नेपाल में तिब्बत सीमा पर प्रकृति का तांडव: 95 की मौत, 105 भारतीयों समेत 500 लापता; भारत की एसएसबी अलर्ट पर

नेपाल में तिब्बत सीमा के पास आई भीषण प्राकृतिक आपदा में 95 लोगों की मौत हो गई। 105 भारतीयों समेत 500 लोग लापता हैं। एसएसबी और भारतीय दूतावास अलर्ट पर हैं।

Aug 26, 2026 - 20:49
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नेपाल में तिब्बत सीमा पर प्रकृति का तांडव: 95 की मौत, 105 भारतीयों समेत 500 लापता; भारत की एसएसबी अलर्ट पर

काठमांडू/ नई दिल्ली : नेपाल में तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ और लैंडस्लाइड ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 95 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 105 भारतीय नागरिकों और 37 एनआरआई (NRI) समेत लगभग 500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी शामिल हैं। तबाही की भयावहता को देखते हुए भारत सरकार ने 1751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सशस्त्र सीमा बल (SSB) की सभी इकाइयों को हाई अलर्ट पर रख दिया है।

उपग्रह तस्वीरों और प्रारंभिक अध्ययन रिपोर्टों के अनुसार, यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा पर अस्थिर पहाड़ी चट्टानों के खिसकने और लेंडे नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण आई। सुबह लगभग 9 बजे भोटेकोशी नदी में आए मलबे और पानी के तेज बहाव ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में भयानक तबाही मचाई। उफनती नदियों ने रास्ते में आने वाले गांवों, 42 किलोमीटर लंबी सड़क कनेक्टिविटी और कई कंक्रीट के पुलों को जमींदोज कर दिया।

105 भारतीय तीर्थयात्री लापता, हेल्पलाइन नंबर जारी
नेपाल पर्यटन बोर्ड (NTB) के मुताबिक, बाढ़ के कारण 384 से अधिक विदेशी व स्थानीय पर्यटक फंसे और लापता हुए हैं। इसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले भारत के 50 से अधिक तीर्थयात्री भी शामिल हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीयों की सहायता और परिजनों तक जानकारी पहुंचाने के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारतीय दूतावास नेपाल सरकार और स्थानीय राहत एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है।

नेपाल में कोसी, भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी बेसिन में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भारतीय सीमा पर कड़ी चौकसी बरती जा रही है।

जवानों की तैनाती: एसएसबी ने सीमावर्ती इलाकों में त्वरित सहायता के लिए 18 राहत दल तैनात किए हैं, जबकि 7 अन्य टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

संवेदनशील जिले: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के घाघरा, महाकाली और करनाली नदी प्रणालियों से जुड़े जिलों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

इस आपदा का बड़ा असर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ा है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (IPPAN) के अनुसार, 354 मेगावाट क्षमता वाली 8 चालू और 5 निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनमें 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी और 78 मेगावाट की संजेन खोला परियोजना प्रमुख हैं।

नेपाली सेना और सुरक्षा बलों ने राहत अभियान चलाते हुए 12 हेलीकॉप्टरों, 5 ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से 80 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। हालांकि, चीनी सीमा की तरफ बनी अस्थायी झील के अभी पूरी तरह खाली न होने के कारण भोटेकोशी और त्रिशूली क्षेत्रों पर खतरा बना हुआ है।

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