samsung के भारत में 30 साल: उपभोक्ता से 'वैश्विक नवाचार केंद्र' बनने तक का शानदार सफर
सैमसंग के 30 वर्ष पूरे होने पर दक्षिण-पश्चिम एशिया सीईओ जेबी पार्क ने कहा कि भारत अब महज एक बाजार न रहकर विश्व के लिए अगली पीढ़ी की AI और उन्नत तकनीकों का नवाचार केंद्र बन चुका है।
लखनऊ : भारत में अपने सफल परिचालन के तीन दशक पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के दक्षिण-पश्चिम एशिया के अध्यक्ष और सीईओ जेबी पार्क ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल नवीनतम तकनीकों को अपनाने वाला एक साधारण उपभोक्ता बाजार नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भविष्य की प्रौद्योगिकियों की परिकल्पना, निर्माण और विकास करने वाला एक अग्रणी देश बन चुका है।
1995 में भारतीय बाजार में कदम रखने वाली सैमसंग ने पिछले 30 वर्षों में देश के भीतर अपने विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), अनुसंधान एवं विकास (R&D) और डिजाइन क्षमताओं का अभूतपूर्व विस्तार किया है। जेबी पार्क के अनुसार, "भारत के बारे में जो बात सबसे ज्यादा प्रेरित करती है, वह यह है कि यह लगातार उम्मीदों से आगे बढ़कर प्रदर्शन करता है। हम इसे केवल 1.4 अरब लोगों के बाजार के रूप में नहीं, बल्कि तकनीक के भविष्य की नींव रखने वाले स्थान के रूप में देखते हैं।"
सैमसंग के बेंगलुरु और नोएडा स्थित रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर्स में कार्यरत भारतीय इंजीनियर दुनिया भर की टीमों के साथ मिलकर अगली पीढ़ी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य जटिल डिजिटल सोल्यूशन्स पर काम कर रहे हैं। कंपनी का यह सफर महज उत्पाद बेचने से आगे बढ़कर 'भारत के साथ मिलकर तकनीक बनाने' का रहा है।
भविष्य के नवाचारों को गति देने के लिए सैमसंग 'सैमसंग इनोवेशन कैंपस' और 'सॉल्व फॉर टुमारो' जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों का संचालन कर रही है। 'सॉल्व फॉर टुमारो' अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जिसके जरिए भारतीय युवाओं को AI, कोडिंग और प्रॉब्लम-सॉल्विंग का विशेष प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया जा रहा है।
अपने संबोधन का समापन करते हुए जेबी पार्क ने कहा कि सैमसंग की वास्तविक विरासत केवल उसके बनाए उपकरणों से नहीं, बल्कि उन लाखों सपनों से मापी जाएगी जिन्हें साकार करने में कंपनी ने योगदान दिया है।
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