आबादी के बीच 'कचरा पॉइंट' से नारकीय हुआ जीवन, बीमारियों का बढ़ा खतरा
अंबेडकरनगर मुख्यालय में आबादी के बीच कचरा डंपिंग से बढ़ा बीमारियों का खतरा। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से सुधार की मांग की।
अंबेडकरनगर (आनंदी मेल संवाददाता): जनपद मुख्यालय के मुख्य कस्बे में नगर पालिका की कचरा संग्रहण व्यवस्था स्थानीय निवासियों के लिए जी का जंजाल बन गई है। घर-घर से कूड़ा उठाने का दावा करने वाली नगर पालिका अब घनी आबादी के बीच ही कचरे का ढेर लगा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने का भय व्याप्त है।
साँस लेना हुआ दूभर, दुर्गंध से बेहाल राहगीर
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मुख्य बाजार और रिहायशी इलाकों को 'अस्थायी डंपिंग ग्राउंड' बना दिया गया है। सुबह से लेकर कचरा उठने तक उठने वाली तीखी दुर्गंध के कारण लोगों का घरों में बैठना मुश्किल हो गया है। सबसे बुरा हाल स्कूली बच्चों और बुजुर्गों का है, जिन्हें मजबूरी में इसी प्रदूषित वातावरण में रहना पड़ रहा है।
- बढ़ रहा है स्वास्थ्य जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खुले में सड़ रहा गीला कचरा बीमारियों का घर है। इससे: - मक्खी-मच्छरों के पनपने से डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड का खतरा बढ़ गया है।
- सड़ते कचरे के बैक्टीरिया हवा के जरिए फेफड़ों तक पहुँचकर साँस की गंभीर बीमारियाँ पैदा कर रहे हैं।
नियमों की अनदेखी: खुली गाड़ियों में ढोया जा रहा कूड़ा
स्वच्छ भारत मिशन के दावों के विपरीत, कचरा उठाने वाली गाड़ियाँ न केवल देरी से पहुँचती हैं, बल्कि कूड़े को बिना ढके ही ले जाया जाता है। इससे रास्ते भर कूड़ा गिरता रहता है और प्रदूषण फैलता है। व्यापारियों और नागरिकों ने मांग की है कि आबादी के बीच से इन 'ट्रांसफर पॉइंट्स' को तत्काल हटाकर शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाए।
नगर पालिका प्रशासन ने हालाँकि सुधार का आश्वासन दिया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्थानीय जनता अब ठोस कार्रवाई का इंतज़ार कर रही है।
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