लखनऊ: महावीर चक्र विजेता शहीद मेजर आशाराम त्यागी का शहादत दिवस मना, 'स्मृति द्वार' का हुआ भव्य उद्घाटन
लखनऊ के त्यागी विहार में महावीर चक्र विजेता शहीद मेजर आशाराम त्यागी की शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ, जहां नवनिर्मित स्मृति द्वार का उद्घाटन किया गया।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गनाइजेशन (एडब्ल्यूएचओ) कॉलोनी 'त्यागी विहार' (आशियाना) में 1965 युद्ध के अमर शहीद महावीर चक्र (मरणोपरांत) विजेता मेजर आशाराम त्यागी का शहादत दिवस पूर्ण सैन्य सम्मान और देशभक्ति के माहौल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अमित कुमार घोष ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
समारोह को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव श्री अमित कुमार घोष ने कहा कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में डोगराई की ऐतिहासिक लड़ाई के दौरान प्रदर्शित मेजर आशाराम त्यागी का अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ऐसे ही वीर सपूतों की बदौलत आज हमारे देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 में इस परिसर का नाम 'त्यागी विहार' रखा गया था, जिसका आदर्श वाक्य “Homes Built on Valor” राष्ट्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
समारोह के दौरान कॉलोनी के नवनिर्मित प्रवेश/निकास द्वार का नामांकरण 'मेजर आशाराम त्यागी, एमवीसी (मरणोपरांत) स्मृति द्वार’ के रूप में किया गया। इस भव्य द्वार का औपचारिक उद्घाटन चीफ ऑफ स्टाफ, मुख्यालय सेंट्रल कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल सी.जे. जयचंद्रन (एवीएसएम, वाईएसएम) ने किया।
3 बटालियन जाट रेजिमेंट के मेजर आशाराम त्यागी ने 21-22 सितंबर 1965 की रात डोगराई युद्ध में अग्रिम टुकड़ी का नेतृत्व किया था। कंधे में दो गोलियां लगने के बाद भी उन्होंने दुश्मन के टैंकों पर ग्रेनेड फेंककर दो टैंकों को अपने कब्जे में लिया था। इसके बाद तीन और गोलियां लगने के बावजूद वे अंत तक लड़ते रहे और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनके इस असाधारण शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘स्मृति संध्या – एक शाम शहीदों के नाम’ ने सभी उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में मेजर आशाराम त्यागी के पौत्र श्री मनीष त्यागी, एडब्ल्यूएचओ के अध्यक्ष ब्रिगेडियर बी.एन. सिंह, कर्नल अरविंद पांडेय, कर्नल एम.एम. घोष, जाट रेजिमेंटल सेंटर के अधिकारी, पूर्व सैनिक और स्थानीय निवासी भारी संख्या में मौजूद रहे।
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