कौशाम्बी में स्कूली छात्राओं की रैली पर गरमाई सियासत, कार्रवाई की मांग

कौशाम्बी में भाजपा महिला नेत्रियों द्वारा छात्राओं से रैली निकलवाने पर विवाद। लोगों ने इसे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बताया।

Apr 24, 2026 - 22:25
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कौशाम्बी में स्कूली छात्राओं की रैली पर गरमाई सियासत, कार्रवाई की मांग

(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)

कौशाम्बी: जनपद मुख्यालय ओसा में महिला आरक्षण बिल के समर्थन में निकाली गई एक रैली विवादों के घेरे में आ गई है। श्री दुर्गा देवी इंटर कॉलेज, ओसा की छात्राओं के जरिए निकाली गई इस रैली ने जिले के प्रबुद्ध वर्ग और अभिभावकों के बीच नई बहस छेड़ दी है। आरोप है कि भाजपा की महिला नेत्रियों ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए उन अबोध छात्राओं का इस्तेमाल किया, जिन्हें राजनीति की 'अ' भी नहीं पता।

रैली के दौरान छात्राओं के हाथों में ऐसे स्लोगन, बैनर और पोस्टर थमाए गए थे, जिनमें विपक्षी दलों—सपा और कांग्रेस—पर तीखे निशाने साधे गए थे। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का सवाल है कि जिस उम्र में बच्चों को अपनी किताबों और खेलकूद पर ध्यान देना चाहिए, उन्हें महिला आरक्षण बिल जैसी जटिल राजनीतिक शब्दावलियों के बीच क्यों धकेला गया?

रैली को लेकर जनमानस में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भाजपा अपनी रैलियों को सफल बनाने के लिए पहले सरकारी मशीनरी का उपयोग करती थी, लेकिन अब यह सिलसिला मासूम स्कूली बच्चों तक पहुँच गया है। लोगों ने इसे भाजपा की 'घृणित मानसिकता' करार देते हुए कहा कि यह बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

जनता के बीच उठ रहे कुछ कड़े सवाल:

  • क्या भाजपा की इन नेत्रियों की अपनी बेटियां भी इस धूप और विरोध रैली का हिस्सा थीं?
  • मध्यम वर्गीय परिवारों की इन छात्राओं को राजनीतिक ढाल बनाना कहाँ तक उचित है?
  • क्या शिक्षा संस्थान अब राजनीतिक अखाड़ा बन चुके हैं?

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। आक्रोशित अभिभावकों और नागरिकों ने जिलाधिकारी (DM) और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि संबंधित कॉलेज के प्रधानाचार्य और भाजपा की उन महिला नेत्रियों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए। लोगों का तर्क है कि यदि आज इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया, तो भविष्य में बच्चों की पढ़ाई बाधित कर उन्हें राजनीतिक रैलियों की भीड़ का हिस्सा बना दिया जाएगा।

फिलहाल, सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं हो रही हैं, और प्रशासन की ओर से अब तक किसी आधिकारिक बयान का इंतजार है।

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