ईंट भट्ठा मजदूर के बेटे सत्यम ने रचा इतिहास, यूपी बोर्ड हाईस्कूल में प्रदेश में चौथा स्थान

प्रतापगढ़ के सत्यम यादव ने यूपी बोर्ड हाईस्कूल में प्रदेश में चौथा और जिले में प्रथम स्थान पाकर इतिहास रचा। ईंट भट्ठा मजदूर का बेटा बना टॉपर।

Apr 24, 2026 - 22:22
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ईंट भट्ठा मजदूर के बेटे सत्यम ने रचा इतिहास, यूपी बोर्ड हाईस्कूल में प्रदेश में चौथा स्थान

कुंडा-प्रतापगढ़: प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती, इसे एक बार फिर साबित कर दिखाया है कुंडा के होनहार छात्र सत्यम यादव ने। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) के हाईस्कूल परिणाम घोषित होते ही सत्यम का नाम और उनके विद्यालय भगवती इंटरमीडिएट कॉलेज (भवानी का पुरवा, डीह बलई) की ख्याति पूरे प्रदेश में फैल गई है।

सत्यम यादव ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर हाईस्कूल की परीक्षा में प्रदेश में चौथा और जनपद प्रतापगढ़ में प्रथम स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया है। कल तक जिस छात्र और विद्यालय को क्षेत्र तक ही सीमित जाना जाता था, आज वह नाम हर व्यक्ति की जुबां पर गर्व के साथ लिया जा रहा है।

सत्यम की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उनके पिता समर बहादुर यादव एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। विकासखंड बाबागंज की ग्राम पंचायत रायगढ़ निवासी समर बहादुर ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। शुक्रवार को सत्यम को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। वैष्णो देवी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रबंधक श्री छोटे लाल यादव समेत शिक्षा जगत की तमाम हस्तियों ने विद्यालय पहुँचकर सत्यम की पीठ थपथपाई।

भगवती इंटरमीडिएट कॉलेज की स्थापना समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी स्वर्गीय श्रीनाथ यादव ने इस उद्देश्य से की थी कि पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को उच्च संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। वर्तमान प्रबंधक सुरेश यादव के कुशल नेतृत्व में अब वह सपना फलीभूत होता दिख रहा है।

विद्यालय के प्रबंधक सुरेश यादव ने बताया कि आगामी 30 अप्रैल को विद्यालय परिसर में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) समेत शिक्षा जगत की कई बड़ी हस्तियां सत्यम यादव को सम्मानित करने के लिए पहुँचेंगी।

सत्यम की इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों और शिक्षकों का सही मार्गदर्शन मिले, तो अभावों के बीच भी सफलता के उच्चतम शिखर को छुआ जा सकता है।

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