प्रतापगढ़: खेतों की सेहत सुधारने के लिए 'मृदा परीक्षण' पर जोर, कालाकांकर में किसानों को नैनो उर्वरक के लाभ बताए
कालाकांकर में इफको द्वारा आयोजित कृषक गोष्ठी में किसानों को मृदा परीक्षण और नैनो उर्वरकों के संतुलित प्रयोग की जानकारी दी गई।
(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)
कुंडा (प्रतापगढ़) : विकास खंड कालाकांकर के ग्राम सराय मुहम्मद सईद, दयालपुर लावना और भवानी गंज में शुक्रवार को नैनो उर्वरक जागरूकता एवं मृदा परीक्षण अभियान के तहत एक दिवसीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के प्रति जागरूक करना था।
वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी आमदनी
कार्यक्रम की अध्यक्षता IFFDC केंद्र प्रभारी अमृत लाल मौर्य ने की। इस दौरान इफको SFA अवनीश सिंह ने किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बिना मृदा परीक्षण (Soil Testing) के उर्वरकों का प्रयोग करना न केवल खर्चीला है, बल्कि यह मिट्टी की गुणवत्ता को भी खराब करता है।
किसानों के लिए मुख्य सुझाव:
- मृदा नमूना: मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि बताई गई ताकि जांच रिपोर्ट सटीक आए।
- लागत में कमी: संतुलित उर्वरक प्रयोग से खेती की लागत कम कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
- NPK कंसोर्टिया: जैविक रूप से पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए इसके उपयोग पर जोर दिया गया।
नैनो यूरिया प्लस और नैनो डीएपी का प्रदर्शन
गोष्ठी में इफको की आधुनिक तकनीक नैनो यूरिया प्लस और नैनो डीएपी के फायदों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि ये पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी हैं और पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। इनका उपयोग करना आसान है और यह फसल की उपज में वृद्धि करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
50 से अधिक किसानों ने लिया प्रशिक्षण
इस जागरूकता अभियान में क्षेत्र के 50 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में किसानों की शंकाओं का समाधान किया गया और उन्हें मृदा कार्ड के आधार पर ही खाद डालने की शपथ दिलाई गई।
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