"भारत: शासन, प्रशासन एवं विरासत" पर केंद्रित रही प्रश्नोत्तरी
सेठ एम. आर. जयपुरिया स्कूल, गोयल कैंपस में 'राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस' पर आयोजित हुई रोमांचक अंतरविद्यालयीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
लखनऊ : राजधानी के प्रतिष्ठित सेठ एम. आर. जयपुरिया स्कूल, गोयल कैंपस में आज 'राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस' (21 अप्रैल) के उपलक्ष्य में एक भव्य अंतरविद्यालयीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य विषय “भारत: शासन, प्रशासन एवं विरासत” रखा गया था, जिसका मूल उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत की जटिल प्रशासनिक व्यवस्था और उसकी गौरवशाली ऐतिहासिक धरोहर से रूबरू कराना था।
चारों हाउस के बीच दिखा कड़ा मुकाबला
प्रतियोगिता में विद्यालय के चारों हाउस—वेव राइडर्स, गेम चेंजर्स, गो-गेटर्स एवं ट्रेलब्लेज़र्स—ने अपनी मेधा का प्रदर्शन किया। प्रत्येक हाउस की टीम में कक्षा VI से XII तक के चयनित छात्र शामिल थे, जो अपनी तार्किक क्षमता और सामान्य ज्ञान के बल पर एक-दूसरे को चुनौती दे रहे थे।
प्रतिभागियों की सूची:
- गेम चेंजर्स: शशांक (XII), ख्याति श्रीवास्तव (IX), अम्मार खान (VIII)
- ट्रेलब्लेज़र्स: आराध्या राय (XII), रिद्धिमान सिंह राजपूत (IX), कुशाग्र सिंह (VIII)
- गो-गेटर्स: धनंजय (XII), कृतिका (X), अन्वी जोशी (VIII)
- वेव राइडर्स: जयंत (XII), गरिमा ठाकुर (IX), मान्हा ताजदार (VII)
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका कुशल प्रबंधन रहा। श्री विशेष कुमार मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में कक्षा XII के छात्रों—अभिराज, अभिनव, सिद्धार्थ, सार्थक एवं आयुष ने पूरी प्रतियोगिता का संचालन बखूबी किया। दर्शक दीर्घा में बैठे कक्षा VII से IX तक के विद्यार्थियों ने न केवल अपनी टीमों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि शासन और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण और रोचक तथ्यों की जानकारी भी प्राप्त की।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. श्रीमती रीना पाठक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों की सूक्ष्म जानकारी और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि, "इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों में टीम वर्क, तार्किक सोच और नागरिक चेतना का विकास होता है, जो उन्हें भविष्य का एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक होगा।"
प्रतियोगिता का समापन विजेताओं की घोषणा और मेधावियों के प्रोत्साहन के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल सिविल सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि इसने छात्रों को भारत की गौरवशाली विरासत से जुड़ने का एक नया दृष्टिकोण भी प्रदान किया।
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