मालिनी अवस्थी ने 'चलो री गुइंया' गाकर मोह लिया सबका मन
माघ मेले में गूंजी लोकगीतों की स्वरलहरी
प्रयागराज : संगम की रेती पर आयोजित माघ मेला 2026 के आध्यात्मिक वातावरण में सांस्कृतिक मिठास घुल गई है। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित 'कला संगम' सांस्कृतिक पंडाल में एक भव्य 'सांस्कृतिक संध्या' का आयोजन किया गया, जहाँ पद्मश्री मालिनी अवस्थी की जादुई प्रस्तुति ने हज़ारों श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ भव्य शुभारंभ कार्यक्रम का उद्घाटन महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी, पद्मश्री मालिनी अवस्थी और संस्कृति विभाग की अपर निदेशक डॉ. सृष्टि धवन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर महापौर ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए भारतीय संस्कृति के संरक्षण में ऐसे आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
लोक कला और भक्ति का अनूठा संगम सांस्कृतिक शाम की शुरुआत उदयचंद परदेसी के देवी गीत से हुई, जिसके बाद वरुण मिश्रा की टीम ने "चलो मन गंगा यमुना तीरे" भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कृति श्रीवास्तव के 'ढेड़िया' लोक नृत्य और नीता जोशी के 'कत्थक' ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। विशेष आकर्षण वाराणसी के राम जनम का दीर्घकालीन शंख वादन रहा, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।
मालिली अवस्थी की भावपूर्ण प्रस्तुति कार्यक्रम का चरमोत्कर्ष पद्मश्री मालिनी अवस्थी का गायन रहा। उन्होंने जैसे ही प्रसिद्ध लोकगीत "चलो री गुइंया, गंगा नहाये लें" शुरू किया, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी गायकी में लोक जीवन की सोंधी खुशबू और गंगा के प्रति अगाध श्रद्धा स्पष्ट झलक रही थी।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति समारोह के समापन पर मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने मालिनी अवस्थी को सम्मानित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. आभा माथुर ने किया। इस दौरान संस्कृति निदेशालय के निदेशक शोभित नाहर, जिला विकास अधिकारी जी.पी. कुशवाहा और अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। यह संध्या न केवल मनोरंजन बल्कि आस्था और कला के अद्भुत मेल की गवाह बनी।
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