कुंडा तहसील: अधिवक्ताओं ने बाबा साहब को बताया 'सिंबल ऑफ नॉलेज', हर्षोल्लास के साथ मनाई 135वीं जयंती
कुंडा तहसील में अधिवक्ताओं ने धूमधाम से मनाई डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती। तहसीलदार और बार अध्यक्ष ने दी श्रद्धांजलि
(एडवोकेट अजय पंडा / ब्यूरो)
कुंडा, प्रतापगढ़। तहसील परिसर स्थित 'दि बार एसोसिएशन' के सभागार में बुधवार को संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बीपी मौर्य की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिवक्ताओं और तहसील प्रशासन ने बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विधान है भारतीय संविधान: तहसीलदार
समारोह के मुख्य अतिथि तहसीलदार अलख शुक्ला ने बाबा साहब के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल एक कानूनविद नहीं, बल्कि एक महान राष्ट्र निर्माता और समाज सुधारक थे। उन्होंने कहा:
"बाबा साहब द्वारा रचित संविधान दुनिया का सबसे श्रेष्ठ लोकतांत्रिक दस्तावेज है। यह संविधान ही है जो भारत के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी देता है।"
विद्वत्ता का दुनिया ने माना लोहा
अध्यक्षीय संबोधन में बीपी मौर्य ने डॉ. अंबेडकर को 'ज्ञान का भंडार' बताते हुए कहा कि उनकी विद्वत्ता और दूरदर्शिता का लोहा पूरी दुनिया मानती थी। उन्होंने कहा कि बाबा साहब दलितों, शोषितों, पीड़ितों और सर्वहारा वर्ग के लिए एक मसीहा के रूप में अवतरित हुए थे। नारी मुक्ति और सामाजिक समानता के लिए उनके संघर्षों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
अधिवक्ताओं ने लिया संकल्प
समारोह का सफल आयोजन एडवोकेट बाल मुकुंद सरोज की देखरेख में किया गया। कार्यक्रम को विमलेश कुमार, संतोष सरोज, कमलेश कुमार, मंजे सरोज और सत्यम मौर्य ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने बाबा साहब के 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' के संदेश को आत्मसात करने का आह्वान किया।
इस विशेष अवसर पर तहसील के अधिकारियों, कर्मचारियों समेत बड़ी संख्या में अधिवक्तागण और वादकारी उपस्थित रहे। पूरा सभागार 'बाबा साहब अमर रहें' के नारों से गुंजायमान रहा।
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