जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बोले डॉ बीएस राजपूत
SESR फाउंडेशन के स्पार्क हेल्थ डायलॉग में डॉ बी एस राजपूत ने लाइफस्टाइल बीमारियों और स्टेम सेल थेरेपी पर चर्चा की।
लखनऊ: सोशल एंड इकोनॉमिक सस्टेनेबिलिटी रिसर्च (SESR) फाउंडेशन के नीति व अनुसंधान मंच SPARK के तहत आयोजित 'SPARK Health Dialogue' में देश के प्रमुख स्टेम सेल व रिजेनरेटिव मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. बी.एस. राजपूत ने भाग लिया। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि लाइफस्टाइल बीमारियां (Lifestyle Diseases) और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCDs) वर्तमान में भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं।
मुंबई से आए वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजपूत ने स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 63 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी रोगों (NCDs) के कारण होती हैं। वर्तमान में देश में 10 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित हैं, जबकि 13.5 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में ही लगभग 80 लाख से एक करोड़ लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं।
इसके अलावा, डॉ. राजपूत ने नी ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और दुर्लभ बीमारियों जैसे ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) तथा एएम्योट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 18 करोड़ लोग आर्थराइटिस से पीड़ित हैं और बढ़ते मोटापे व सेडेंटरी जीवनशैली के कारण अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
उन्नत चिकित्सा तकनीकों पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टेम सेल और सेलुलर थेरेपी पारंपरिक उपचार पद्धतियों का पूरक (Adjunct Therapy) हो सकती हैं। इनका उपयोग हमेशा कड़े वैज्ञानिक प्रमाणों, नैतिक मानकों और नियामकीय दिशानिर्देशों के तहत ही किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में SESR फाउंडेशन के प्रोग्राम डायरेक्टर राकेश मिश्र ने कहा कि इस संवाद का उद्देश्य नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों और समाज के बीच साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य जानकारी को बढ़ावा देना है।
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