डिजिटल क्रांति से सशक्त होंगे कौशाम्बी के शिल्पकार: सिराथू में एआई और ई-कॉमर्स पर हुआ ऐतिहासिक मंथन

कौशाम्बी में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों को एआई, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स से जोड़ने के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ।

Sep 19, 2026 - 20:57
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डिजिटल क्रांति से सशक्त होंगे कौशाम्बी के शिल्पकार: सिराथू में एआई और ई-कॉमर्स पर हुआ ऐतिहासिक मंथन

कौशाम्बी। राजकीय आई.टी.आई, सिराथू में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) भारत सरकार के प्रयागराज कार्यालय द्वारा "पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत ब्रांडिंग, मार्केटिंग एवं एआई" विषय पर एक दिवसीय जागरूकता शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले के पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल व्यापार से जोड़कर उन्हें 'आत्मनिर्भर' बनाना था। शिविर में जनपद के 110 विश्वकर्मा लाभार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। स्वागत संबोधन में MSME विकास कार्यालय के सहायक निदेशक श्री संजय कुमार ने बताया कि बदलते दौर में पारंपरिक उत्पादों की ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और AI तकनीक अत्यंत आवश्यक है।

तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया:

एआई और आधुनिक तकनीक: राजकीय आई.टी.आई की प्रबंधक श्रीमती दीपा श्रीवास्तव ने ChatGPT, Claude और Gemini जैसे AI टूल्स के जरिए बिजनेस प्रमोशन और ग्राहक संपर्क बढ़ाने के तरीके सिखाए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म ऑनबोर्डिंग: ONDC टीम द्वारा 8 कारीगरों का डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तुरंत पंजीकरण कराया गया, जिससे उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल सके।

डिजिटल पेमेंट की शुरुआत: इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने डिजिटल साक्षरता की जानकारी दी और मौके पर ही 10 विश्वकर्मा कारीगरों के व्यावसायिक क्यूआर कोड तैयार किए।

पैकेजिंग एवं बैंक सेवाएं: भारतीय पैकेजिंग संस्थान, लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. अंशुमन श्रीवास्तव ने उत्पाद विकास व आकर्षक पैकेजिंग के गुर बताए, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा के एलडीएम श्री नवीन झा ने बैंकिंग ऋण प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया।

MSME के निदेशक श्री एल.बी.एस. यादव और उपायुक्त उद्योग श्री अशोक कुमार ने कारीगरों से सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ उठाने और तकनीक अपनाने का आह्वान किया। ओपन हाउस चर्चा में कारीगरों की शंकाओं का समाधान किया गया। यह आयोजन स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को नई पहचान देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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