कानपुर में 'शिक्षा से वंचित बच्चों की पाठशाला' में उमड़ा स्नेह; चॉकलेट और फ्रूटी पाकर खिले मासूमों के चेहरे

कानपुर में 'शिक्षा से वंचित बच्चों की पाठशाला' में योगिता मिश्रा ने चॉकलेट और फल बांटकर बिखेरी मुस्कान, बच्चों ने कहा थैंक्यू

Jul 10, 2026 - 20:42
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कानपुर में 'शिक्षा से वंचित बच्चों की पाठशाला' में उमड़ा स्नेह; चॉकलेट और फ्रूटी पाकर खिले मासूमों के चेहरे

कानपुर : शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समाज में संवेदनशीलता और आपसी जुड़ाव का माध्यम भी है। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायी नजारा कानपुर के मैनावती मार्ग, ख्यौरा स्थित उजियारी देवी मंदिर परिसर में देखने को मिला। यहाँ संचालित हो रही 'शिक्षा से वंचित बच्चों की पाठशाला' में आज बच्चों के बीच जबरदस्त स्नेह, अपनापन और खुशियाँ बिखरीं।

श्रीमती योगिता मिश्रा ने इस अनूठी पाठशाला के नन्हें-मुन्ने बच्चों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हुए उन्हें केला, चिप्स, फ्रूटी और चाॅकलेट वितरित किए। इन बच्चों के लिए यह सामग्री महज फल या टॉफियाँ नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी बड़ी बहन का दुलार था, जो समाज की मुख्यधारा से दूर रह रहे बच्चों के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहती थी।

जैसे ही योगिता मिश्रा ने अपने हाथों से बच्चों को केले और चॉकलेट के पैकेट सौंपे, वैसे ही पूरा क्लासरूम मासूमों की चहचहाहट और "दी, थैंक्यू!" के नारों से गूंज उठा। किसी के हाथ में पसंदीदा फ्रूटी थी तो कोई चिप्स का पैकेट पाकर अपनी खुशी नहीं छुपा पा रहा था। उस वक्त बच्चों के चेहरों पर भूख से कहीं ज्यादा अपनों के बीच होने की तृप्ति और आत्मसंतोष साफ नजर आ रहा था।

इस सेवा कार्य के अवसर पर पाठशाला के संचालक श्री ददन मिश्रा, शिक्षिकाएं श्रीमती पुष्पा शुक्ला एवं श्रीमती गीता शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

बच्चों के बीच इस स्नेह को देखकर भावुक हुए संचालक श्री ददन मिश्रा ने कहा: "जब समाज के सक्षम लोग खुद आगे आकर इन वंचित बच्चों को गले लगाते हैं और अपनाते हैं, तभी हमारी असली शिक्षा पूरी होती है। आज योगिता जी ने यहाँ आकर इन बच्चों के बीच ममता की एक अनूठी मिसाल कायम की है।"

गौरतलब है कि इस विशेष पाठशाला में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे बेहद गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। पारिवारिक तंगी के कारण ये मासूम अक्सर अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं और खुशियों से वंचित रह जाते हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में जब कोई समाज का सहृदय व्यक्ति इनके बीच कुछ पल बिताता है और प्यार से कुछ बांटता है, तो वही पल इन मासूमों के लिए सबसे बड़े त्योहार और उत्सव जैसा बन जाता है।

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