एचडीएफसी बैंक के 'परिवर्तन' ने उत्तर भारत में 3.26 लाख एकड़ खेत को पराली से बचाया
एचडीएफसी बैंक के 'परिवर्तन' कार्यक्रम ने उत्तर भारत में 3.26 लाख एकड़ से अधिक खेत को पराली जलाने से बचाया
लखनऊ: विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर एचडीएफसी बैंक ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कार्यक्रम 'परिवर्तन' के तहत एक बड़ी पर्यावरणीय कामयाबी का ऐलान किया है। सीआईआई (CII) फाउंडेशन के साथ मिलकर चलाई गई 'फसल अवशेष प्रबंधन' (CRM) पहल के जरिए बैंक ने पंजाब और हरियाणा के 3.26 लाख एकड़ से अधिक खेत को पराली जलाने से बचाने में सफलता हासिल की है। यह पहल उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने की दिशा में निजी क्षेत्र का एक बड़ा और प्रभावी कदम साबित हो रही है।
इस मुहिम के तहत साल 2025 के सीजन में पंजाब के लुधियाना व संगरूर और हरियाणा के फतेहाबाद जिले के 380 से अधिक गांवों के लगभग 86,000 किसानों को जोड़ा गया। नतीजतन, लक्षित कुल 3,78,425 एकड़ खेतों में से 88 फीसदी हिस्से पर पराली नहीं जलाई गई।
परिवर्तन की बड़ी उपलब्धियां:
- 8 गांव पराली जलाने की प्रथा से पूरी तरह मुक्त (100% प्रदूषण मुक्त) हो चुके हैं।
- 174 गांवों ने 90 फीसदी से अधिक 'नॉन-बर्निंग' (बिना जलाए) नियमों का कड़ाई से पालन किया है।
- सहकारी टूल बैंकों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि मशीनों की पहुंच आसान बनाई गई।
बदलाव की बयार पर क्या बोलीं अधिकारी?
एचडीएफसी बैंक की सीएसआर प्रमुख नुसरत पठान ने इस सफलता पर कहा, "पराली जलाना सिर्फ खेती से जुड़ी आदत नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और पहुंच की एक व्यवस्थागत चुनौती है। हमने किसानों को बायोगैस और कम्पोस्टिंग जैसे खेत से बाहर के (एक्स-सीटू) समाधान दिए हैं, जिससे किसानों की बचत भी हो रही है और पर्यावरण भी सुरक्षित रह रहा है।"
गौरतलब है कि एक टन पराली जलाने से हवा में 3 किलो 'पार्टिकुलेट मैटर' (PM) घुल जाता है और जमीन की उपजाऊ शक्ति नष्ट होती है। इस कार्यक्रम ने व्यवहार में बदलाव लाकर छोटे किसानों की राह आसान की है।
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