संगठित गैंगस्टरों और आतंक के नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए पांच राज्यों के डीजीपी और एनआईए की बैठक
पांच राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और एनआईए प्रमुख ने संगठित अपराध, गैंगस्टरों और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाई।
नई दिल्ली: देश में पैर पसार रहे संगठित अपराध, हथियार तस्करी और सीमा पार से संचालित होने वाले गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ (Gangster-Terror Nexus) को जड़ से खत्म करने के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) और उत्तर भारत के पांच राज्यों के पुलिस प्रमुखों (DGPs) के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों (DGPs) ने हिस्सा लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों में सक्रिय आपराधिक गैंगों के खिलाफ एक साझा और कड़ा एक्शन प्लान तैयार करना था।
सुरक्षा एजेंसियों के इन शीर्ष अधिकारियों ने जेलों के भीतर से चलाए जा रहे जबरन वसूली (extortion) रैकेट, विदेशों में छिपे गैंगस्टरों के नेटवर्क और ड्रोन के माध्यम से होने वाली हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। एनआईए के महानिदेशक ने जोर देकर कहा कि स्थानीय गैंगों का इस्तेमाल अब राष्ट्र-विरोधी ताकतें और आतंकी संगठन देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए कर रहे हैं, जिसे केवल साझा खुफिया तंत्र (Shared Intelligence) के जरिए ही रोका जा सकता है।
इस रणनीतिक बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया, जिसके तहत एनआईए और इन पांचों राज्यों की पुलिस के बीच रीयल-टाइम सूचना साझा करने (Real-time Information Sharing) के लिए एक विशेष वर्किंग ग्रुप का गठन किया जाएगा। इसके अलावा, मोस्ट वांटेड गैंगस्टरों की संपत्तियों को कुर्क करने और विदेश में बैठे अपराधियों के प्रत्यर्पण (extradition) की कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर भी आम सहमति बनी।
उत्तर प्रदेश और पंजाब के पुलिस प्रमुखों ने अपने-अपने राज्यों में गैंगस्टरों के खिलाफ की गई हालिया सख्त कार्रवाइयों और जेल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण साझा किया। सभी राज्यों ने एक सुर में माना कि अंतर-राज्यीय सीमाओं पर गश्त बढ़ाने और अपराधियों के वित्तीय स्रोतों (Money Trails) को फ्रीज करने से इन सिंडिकेट्स की कमर तोड़ी जा सकती है।
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