लखनऊ: 'दावत-ए-सुख़न' में जमके चमकी शाइरी, देश के दिग्गज शायरों-कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधा समां
लखनऊ के गोल्डन ब्लॉसम रिसॉर्ट में आयोजित 'दावत-ए-सुख़न' में देश के नामचीन शायरों और कवियों ने काव्य पाठ कर अदब और गंगा-जमुनी तहजीब का बेजोड़ संगम पेश किया।
लखनऊ : नवाबों के शहर लखनऊ की फिजाओं में शनिवार को काव्य और शायरी की ऐसी महफिल सजी, जिसने हर साहित्य प्रेमी का दिल जीत लिया। 'अदब वह रोशनी है, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और समाज को संवेदनशील बनाती है' इसी उद्देश्य को साकार करते हुए 'गोल्डन ब्लॉसम इम्पीरियल रिसॉर्ट्स' में सांस्कृतिक व साहित्यिक कार्यक्रम 'दावत-ए-सुख़न' का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक शाम में देश भर से आए प्रख्यात शायरों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने एक मंच पर जुटकर भारतीय संस्कृति और साहित्य का बेजोड़ उदाहरण प्रस्तुत किया।
इस विशेष मुशायरे और कवि सम्मेलन में हास्य, व्यंग्य, ग़ज़ल, गीत और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत रचनाओं का सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिला। कार्यक्रम में नदीम फर्रूख़, हसन काज़मी, वासिफ फ़ारूक़ी, शबीना अदीब, सर्वेश अस्थाना, जौहर कानपुरी, प्रियांशु गजेंद्र, हेमंत पांडे, शंभू शिखर, सोनरूपा, राम प्रसाद बेखुद और फ़ैज़ ख़ुमार जैसे देश के प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी दमदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। हर एक शेर और कविता पर प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट और "वाह-वाह" की गूंज से सराबोर रहा।
यह आयोजन केवल शायरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने का एक सशक्त संदेश भी दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजक 'दावत-ए-सुख़न' एवं 'गोल्डन ब्लॉसम' के हेड सेल्स एंड मार्केटिंग, श्री शादाब वारसी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "दावत-ए-सुख़न केवल एक साहित्यिक मंच नहीं, बल्कि हमारी साझा विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक माध्यम है। हमारा प्रयास है कि ऐसे कार्यक्रमों के जरिए लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब और साहित्यिक समृद्धता को निरंतर बढ़ावा मिलता रहे। साहित्य प्रेमियों से मिले इस अपार स्नेह के लिए हम आभारी हैं और भविष्य में भी ऐसे भव्य आयोजनों की श्रृंखला जारी रखेंगे।"
(आर.एल.पाण्डेय / संवाददाता)
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