अतिवृष्टि पीड़ितों को मिलेगी फौरी राहत, मुख्य सचिव बोले- बजट की कमी नहीं, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने साप्ताहिक बैठक में अतिवृष्टि पीड़ितों को तुरंत मुआवजा देने, फसल क्षति के आकलन, ई-ड्राइव चार्जिंग स्टेशन और अम्बेडकर मूर्ति स्थल कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
लखनऊ : प्रदेश में चक्रवात के असर से हुई भारी बारिश से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठक की। इसमें राहत कार्यों, फसल नुकसान के आकलन, डॉ. आम्बेडकर मूर्ति स्थल विकास और पीएम ई-ड्राइव योजना की प्रगति परखी गई।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति से प्रभावित परिवारों को नियमानुसार तुरंत मुआवजा दिया जाए। जिनके घर बारिश में गिर गए हैं, उन्हें अनुमन्य सहायता देने के साथ पात्रता जांचकर आवास योजना का लाभ भी दिलाया जाए। फसल नुकसान का जल्द सर्वे कराकर किसानों के खातों तक मुआवजा राशि पहुंचाने को भी कहा गया।
उन्होंने साफ किया कि राहत कार्यों के लिए बजट पर्याप्त है। जिन जनपदों को अतिरिक्त धनराशि चाहिए, वे बिना देर किए मांग-पत्र शासन को भेजें। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य गंभीरता व संवेदनशीलता से हों, इस पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में आए आवेदनों का बीमा कंपनियों से तालमेल बनाकर शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश भी दिए गए।
डॉ. आम्बेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना की समीक्षा में सामने आया कि कुछ जनपदों में लक्ष्य के अनुसार आवेदन नहीं मिले हैं। मुख्य सचिव ने संबंधित डीएम को जनप्रतिनिधियों से संवाद कर आवेदन जुटाने और औपचारिकताएं पूरी कर काम शुरू कराने को कहा। बैठक में बताया गया कि श्रावस्ती में सभी 8 मूर्ति स्थलों पर विकास कार्य शुरू हो चुका है।
पीएम ई-ड्राइव के तहत एनसीआर व नॉन-एनसीआर में चिन्हित 238 स्थानों में से 99 पर एमओयू हो चुके हैं, जबकि 139 स्थानों पर हस्ताक्षर बाकी हैं। मुख्य सचिव ने इन्हें तेजी से पूरा कराने के कड़े निर्देश दिए।
दूसरे चरण में 1500 स्थानों को चार्जिंग स्टेशन के लिए चिन्हित करने का लक्ष्य तय हुआ है। डीएम को सार्वजनिक स्थलों, बड़े कार्यालयों, बस स्टेशनों, इंडस्ट्रियल पार्कों, शिक्षण संस्थानों, मॉल, ढाबों और पार्किंग स्थलों जैसी जगहों की पहचान कर प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजने को कहा गया, ताकि ईवी चार्जिंग ढांचा समयबद्ध ढंग से विकसित हो सके। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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