खेत में नैनो का कमाल: प्रयागराज के किसानों को कोरडेट ने सिखाए सस्ती खेती के गुर

प्रयागराज के खानपुर डांडी में इफको कोरडेट की किसान चौपाल में नैनो यूरिया प्लस और नैनो डीएपी के फायदे बताए गए, किसानों ने अनुभव साझा किए और जैव अपघटक बांटे गए।

Sep 29, 2026 - 22:08
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खेत में नैनो का कमाल: प्रयागराज के किसानों को कोरडेट ने सिखाए सस्ती खेती के गुर

(जैनुल आब्दीन)

प्रयागराज। कम लागत में बेहतर उपज और टिकाऊ खेती का मंत्र लेकर मोतीलाल नेहरू फार्मर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (कोरडेट), इफको फूलपुर की टीम मंगलवार को प्रतापपुर विकास खंड के ग्राम खानपुर डांडी पहुंची। यहां 29 सितंबर 2026 को आयोजित किसान चौपाल में किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी गई।

समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम के प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि खेती में नई तकनीकों के इस्तेमाल से सस्ती और टिकाऊ खेती की राह खुल सकती है। उन्होंने किसानों को कोरडेट और इफको की गतिविधियों से अवगत कराया और जैव उर्वरकों तथा जैव अपघटकों के उपयोग के तरीके समझाए। उन्होंने बताया कि संस्थान प्रधानाचार्य डॉ. विवेक दीक्षित के मार्गदर्शन में लगातार किसानों की सेवा में जुटा है।

प्रभारी प्रशिक्षण मुकेश तिवारी ने नैनो यूरिया प्लस, नैनो कॉपर, नैनो जिंक और नैनो डीएपी के उपयोग की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नैनो डीएपी की 500 मिलीलीटर की बोतल केवल 600 रुपये की है, जबकि नैनो यूरिया प्लस की इतनी ही मात्रा की बोतल 225 रुपये में उपलब्ध है। ये दाम पारंपरिक दानेदार उर्वरकों की तुलना में काफी कम हैं। मौजूदा धान की फसल में नैनो यूरिया प्लस की 4 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई।

चौपाल में किसानों ने खुद भी अपने अनुभव रखे। रामजनक पटेल, ओमप्रकाश पटेल, अनिल सिंह और रणजीत सिंह ने बताया कि धान में नैनो उर्वरकों के प्रयोग से वे संतुष्ट हैं और परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। इसके बाद प्रतिभागी किसानों को नैनो उर्वरक आधारित प्रयोग वाली धान की फसल का प्रत्यक्ष अवलोकन भी कराया गया, जिससे उन्हें तकनीक को नजदीक से समझने का मौका मिला।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी किसानों को फसल अवशेषों को सड़ाने के लिए निःशुल्क जैव अपघटक वितरित किए गए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्र के प्रगतिशील किसान बी.डी. सिंह ने की। उन्होंने सभी अतिथियों और किसानों का आभार जताते हुए कहा कि संगठित प्रयासों से ही कृषि क्षेत्र का विकास संभव है।

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