"स्वस्थ रेलकर्मी, सुरक्षित रेल": उत्तर मध्य रेलवे ने सफाई मित्रों और संविदा कर्मचारियों के लिए छेड़ी अनोखी स्वास्थ्य क्रांति
उत्तर मध्य रेलवे ने जीएम नरेश पाल सिंह के नेतृत्व में सफाई मित्रों और संविदा कर्मियों हेतु कार्यस्थल पर स्वास्थ्य जांच, आयुष्मान कार्ड और जीवनरक्षक प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण जैसी मिसाल पेश की है।
(रिपोर्ट: जैनुल आब्दीन)
प्रयागराज : "स्वस्थ कर्मचारी, स्वस्थ रेलवे" के मूल मंत्र को साकार करते हुए उत्तर मध्य रेलवे (NCR) ने अपने जमीनी कार्यबल के लिए एक नई मिसाल कायम की है। महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के संवेदनशील और दूरदर्शी नेतृत्व में रेलवे ने संविदा कर्मचारियों, स्टेशन पर कार्यरत कर्मियों और स्वच्छता कर्मियों (सफाई मित्रों) के शारीरिक व मानसिक कल्याण के लिए व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा अभियानों का सफल संचालन किया है।
अक्सर नियमित स्वास्थ्य देखभाल से वंचित रह जाने वाले इन जमीनी कर्मचारियों के लिए उनके कार्यस्थल पर ही विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए गए। इस दौरान डायबिटीज, हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें की गईं, ताकि संभावित बीमारियों का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाकर तुरंत इलाज शुरू किया जा सके। इसके अलावा रेलवे स्टेशनों, वर्कशॉप, शेडों और अस्पतालों में सघन अभियान चलाकर संविदा कर्मचारियों के 'आयुष्मान कार्ड' भी बनाए जा रहे हैं।
कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देते हुए स्वच्छता एवं रख-रखाव कार्यों में जुटे सफाई मित्रों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE), सुरक्षा मास्क और अन्य सुरक्षात्मक सामग्री वितरित की गई। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक तंदुरुस्ती के लिए योग, तनाव प्रबंधन, रिलैक्सेशन तकनीक और संतुलित जीवनशैली पर इंटरैक्टिव सत्रों का आयोजन किया गया।
एक अनूठी पहल के तहत कर्मचारियों को इमरजेंसी में जीवन बचाने योग्य बनाने के लिए सीपीआर (CPR) का व्यावहारिक प्रदर्शन और प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) प्रशिक्षण दिया गया। आम जनमानस और संविदा कर्मियों की सुगमता के लिए स्थानीय भाषा में एक विशेष 'प्राथमिक चिकित्सा गाइडबुक' भी जारी की गई है।
'स्वच्छता ही सेवा' और 'स्वच्छता पखवाड़ा' के तहत रेलवे कॉलोनियों और स्टेशनों पर व्यापक स्वच्छता अभियानों के साथ-साथ चार-रंगों वाले कचरा पृथक्करण प्रणाली (हरा, नीला, लाल और काला डिब्बा) को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।
उत्तर मध्य रेलवे का यह संवेदनशील प्रयास न केवल संविदा कर्मचारियों और सफाई मित्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है, बल्कि संपूर्ण रेलवे इकोसिस्टम में एक समावेशी, सुरक्षित और सहयोगी कार्य संस्कृति को भी मजबूत कर रहा है।
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