कुंडा: डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती पर वैचारिक संगोष्ठी, निबंध प्रतियोगिता में आरूषी ने मारी बाजी

कुंडा में डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती पर संगोष्ठी और निबंध प्रतियोगिता। डॉ. रणजीत सिंह ने विजेताओं को किया सम्मानित

Apr 15, 2026 - 22:18
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कुंडा: डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती पर वैचारिक संगोष्ठी, निबंध प्रतियोगिता में आरूषी ने मारी बाजी

कुंडा, प्रतापगढ़। संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर अवधेशपुरम् (ऐंठू) में दिव्य ज्योति सेवा संस्थान भुपियामऊ द्वारा भव्य संगोष्ठी एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से बाबा साहेब के सामाजिक योगदान और उनके दूरदर्शी विचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।

संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए संस्थान के अध्यक्ष डाॅ. रणजीत सिंह ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का नाम आते ही मस्तिष्क में संविधान निर्माण की तस्वीर उभरती है, लेकिन उनका व्यक्तित्व इससे कहीं अधिक व्यापक था। उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल, 1891 को महू में जन्मे बाबा साहेब ने लंदन और कोलंबिया विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त कर न केवल जातिवाद और सामाजिक असमानता के खिलाफ युद्ध छेड़ा, बल्कि एक अर्थशास्त्री, संपादक और प्रोफेसर के रूप में भी राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया।

अर्थव्यवस्था और श्रमिक सुधारों के जनक

  • कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ. अवधेश सिंह ने डॉ. अंबेडकर के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया:
  • RBI की स्थापना: 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक के गठन के पीछे बाबा साहेब की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
  • श्रमिक अधिकार: भारत में काम के घंटों को 14 से घटाकर 8 घंटे कराने का श्रेय उन्हीं को जाता है।
  • प्रशासनिक सुधार: उन्होंने 1955 में ही बेहतर शासन के लिए मध्य प्रदेश और बिहार के विभाजन का प्रस्ताव दिया था।
  • वैचारिक स्पष्टता: वे संस्कृत को राजभाषा बनाने के पक्षधर थे और अनुच्छेद 370 के प्रखर विरोधी थे।

जयंती के अवसर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में क्षेत्र के कई जागरूक नागरिकों और युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने "डॉ. अंबेडकर का राष्ट्र निर्माण में योगदान" विषय पर अपने विचार रखे।

  • प्रथम स्थान: आरूषी सिंह
  • द्वितीय स्थान: दीपक यादव
  • तृतीय स्थान: प्रदीप मिश्रा

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. रणजीत सिंह ने मेधावियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान भारी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और बाबा साहेब के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया।

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