कागज़ों पर 'स्वच्छता', ज़मीन पर 'बीमारी का न्योता': संचारी रोग अभियान के दावों का निकला जनाज़ा!
कौशाम्बी में 1 से 31 अक्टूबर तक जारी विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान की हवा निकल गई है। नगर निकायों और ग्राम पंचायतों में गंदगी व जलजमाव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
कौशाम्बी। शासन के सख्त निर्देशों के बाद कौशाम्बी जनपद में 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलाए जा रहे विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिलकुल उलट नजर आ रही है। जिले की नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों में नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं, सड़कों के किनारे कूड़े के ऊंचे ढेर लगे हैं और मच्छररोधी छिड़काव न होने से ग्रामीणों व कस्बाइयों में संक्रामक बीमारियों का खौफ गहराने लगा है।
नगर पालिका भरवारी, मंझनपुर समेत नगर पंचायत दारा नगर, सिराथू, अजुहा, चरवा, करारी, पश्चिम पूरब शरीरा, सराय अकील और चायल के विभिन्न मोहल्लों में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अभियान केवल बैठकों और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गया है। नालियों में ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव तो दूर, नियमित सफाई तक नहीं हो पा रही है। पानी की निकासी बाधित होने से जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य और विकास विभाग कागजी आंकड़े दुरुस्त कर आलाधिकारियों को ऑल इज वेल का रिपोर्ट कार्ड भेज रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर जमा बदबूदार कूड़े और नालियों की सिल्ट से बीमारियां फैलने की पूरी संभावना बनी हुई है।
क्षेत्रीय जनता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई मानने के बजाय उच्च अधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। जिन इलाकों में सफाई व्यवस्था बदहाल है, वहां तत्काल सफाई कर्मचारी तैनात कर फॉगिंग, ब्लीचिंग छिड़काव और कूड़ा निस्तारण सुनिश्चित कराया जाए ताकि संचारी रोग नियंत्रण अभियान का असली मकसद पूरा हो सके।
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