दिवंगत आईआरएस सुशील कांत मिश्रा के काव्य-संग्रह ‘माई मून विंडो एंड मी’ का लोकार्पण
कानपुर में दिवंगत IRS सुशील कांत मिश्रा के काव्य-संग्रह का विमोचन हुआ, जिसमें उनकी संवेनदशील कविताओं और दार्शनिक सोच को संजोया गया है।
कानपुर। शहर के ‘द इंटरनेशनल सेंटर’ का लॉन शनिवार शाम एक भावपूर्ण साहित्यिक और संगीतात्मक संगम का गवाह बना। अवसर था—भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के पूर्व अधिकारी दिवंगत सुशील कांत मिश्रा के मरणोपरांत प्रकाशित काव्य-संग्रह ‘माई मून विंडो एंड मी’ के विमोचन का।
यह संध्या केवल एक पुस्तक लोकार्पण नहीं, बल्कि एक ऐसे प्रशासनिक अधिकारी को काव्यात्मक श्रद्धांजलि थी, जिनका हृदय साहित्य और संवेदनाओं से ओतप्रोत था। 1980 बैच के IRS अधिकारी रहे सुशील कांत मिश्रा, जो प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, अपने पीछे कविताओं की एक अनमोल विरासत छोड़ गए हैं।
दार्शनिक गहराई और 80 के दशक की यादें इस संग्रह में सम्मिलित रचनाएँ मुख्य रूप से 1980 के दशक के उत्तरार्ध और 1990 के दशक के दौरान लिखी गई थीं। ये कविताएँ पाठक को एकांत, समय के प्रवाह और आत्मचिंतन की यात्रा पर ले जाती हैं। उनकी लेखनी में न केवल भाषा पर गहरी पकड़ नजर आती है, बल्कि जीवन के प्रति एक सूक्ष्म दार्शनिक दृष्टिकोण भी झलकता है।
पत्नी और पुत्री का साझा प्रयास इस पुस्तक को मूर्त रूप देने का श्रेय उनकी पत्नी मधुलिका मिश्रा को जाता है, जिन्होंने उनके निधन के बाद इन अनमोल यादों को सहेजने का बीड़ा उठाया। पुस्तक का संपादन मधुलिका मिश्रा और पल्लवी मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया है।
आयोजन के दौरान उपस्थित परिजनों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने दिवंगत कवि से जुड़े संस्मरण साझा किए। सुरीले संगीत के बीच जब उनकी कविताओं का पाठ हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स उनकी संवेदनशीलता और सौम्य हास्य की यादों में खो गया। यह आयोजन सिद्ध करता है कि एक अधिकारी की कठोर व्यस्तताओं के बीच भी एक कवि की आत्मा सदैव जीवंत रह सकती है।
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