यूपी में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्षों को सौंपी गई प्रशासक की जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: पहली बार जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में किया गया नियुक्त।

Jul 11, 2026 - 17:56
Updated: 2 hours ago
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यूपी में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्षों को सौंपी गई प्रशासक की जिम्मेदारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। राज्य के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार, उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों (District Panchayat Chairpersons) को उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद अंतरिम अवधि के लिए प्रशासक (Administrators) के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया है।

अब तक की पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार, पंचायत बोर्डों का कार्यकाल समाप्त होने पर नौकरशाहों, जैसे कि जिलाधिकारियों (DM) या मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। हालांकि, सरकार के इस नए कदम से लोकतांत्रिक रूप से चुने गए जनप्रतिनिधियों के हाथों में ही प्रशासनिक कमान बनी रहेगी।

पंचायती राज विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस नए नियम से ग्रामीण विकास योजनाओं की निरंतरता बनाए रखने में बड़ी मदद मिलेगी।

  • शक्तियों का हस्तांतरण: प्रशासक नियुक्त होने के बाद जिला पंचायत अध्यक्षों के पास विकास कार्यों की स्वीकृति देने और बजट आवंटन करने की सभी वित्तीय व प्रशासनिक शक्तियां मौजूद रहेंगी।
  • विकास कार्यों में तेजी: नौकरशाही के हस्तक्षेप के बिना ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही जल जीवन मिशन, सड़क निर्माण और स्वच्छता से जुड़ी योजनाएं बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेंगी।
  • अधिकारियों के साथ समन्वय: अध्यक्ष अब सीधे तौर पर पंचायती राज अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर बतौर प्रशासक बैठकें कर सकेंगे।

"यह फैसला ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत करने वाला है। जनप्रतिनिधियों को प्रशासक की भूमिका देने से जनता के प्रति उनकी जवाबदेही बनी रहेगी और फाइलों के चक्कर में विकास कार्य नहीं अटकेंगे।" - ओम प्रकाश राजभर, पंचायती राज मंत्री, उत्तर प्रदेश

सरकार के इस अप्रत्याशित फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मुख्य विपक्षी दलों ने इस कदम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार पिछले दरवाजे से अपने चहेते अध्यक्षों को प्रशासनिक पदों पर बनाए रखना चाहती है, जिससे आगामी पंचायत चुनावों की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए गए हैं ताकि इसे अदालत में चुनौती न दी जा सके। जिला स्तर पर इन नए प्रशासकों की तैनाती की प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी गई है।

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