शिमला: सीएम सुक्खू ने ऐतिहासिक बैंटनी कैसल में पहले डिजिटल संग्रहालय का किया उद्घाटन
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला के ऐतिहासिक बैंटनी कैसल में हिमाचल प्रदेश के पहले डिजिटल संग्रहालय का उद्घाटन किया।
शिमला : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने शिमला की ऐतिहासिक एवं 140 वर्ष पुरानी इमारत 'बैंटनी कैसल' में प्रदेश के पहले अत्याधुनिक डिजिटल संग्रहालय (Digital Museum) का भव्य उद्घाटन किया।
भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा लगभग ₹8 करोड़ की लागत से तैयार यह डिजिटल संग्रहालय अब आम जनता और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक संस्थान का उद्घाटन नहीं है, बल्कि यह संग्रहालय हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के माध्यम से भविष्य की पीढ़ी से जोड़ने वाला एक मजबूत सेतु बनेगा।3D स्कैनिंग और वीआर तकनीक से जीवंत होगी देव संस्कृतिब्रिटिश काल की इस ऐतिहासिक धरोहर में स्थापित डिजिटल संग्रहालय में पर्यटकों को एक अनोखा और रोमांचक अनुभव मिलेगा।
अत्याधुनिक तकनीक: संग्रहालय में हाई-रिजॉल्यूशन 3D स्कैनिंग, वर्चुअल रियलिटी (VR), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और होलोस्कोप तकनीकों का उपयोग किया गया है। विरासत का पिटारा: इंटरएक्टिव टच स्क्रीन के एक स्पर्श से हिमाचल की लोक संस्कृति, देव परंपराओं, पारंपरिक काष्ठ कला, चंबा रूमाल, पहाड़ी लघु चित्रकला और मेलों-उत्सवों की विस्तृत जानकारी मिलेगी। कालका-शिमला रेलवे: यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर कालका-शिमला टॉय ट्रेन के इतिहास को भी डिजिटल माध्यमों से बेहद जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है।
"हम स्कूल के दिनों से इस ऐतिहासिक इमारत को देखते आ रहे हैं, जहां पहले डीजीपी कार्यालय हुआ करता था। अब युवा और शोधकर्ता यहां आकर बिना किसी गाइड के तकनीक की मदद से हिमाचल के गठन और इसके विकास की गाथा को करीब से समझ सकेंगे।" - ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्रीपर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बनेगा बैंटनी कैसलविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों की तर्ज पर बने इस डिजिटल संग्रहालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और हिमाचल के निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार के योगदान को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है।
संग्रहालय के क्यूरेटर डॉ. हरी चौहान ने बताया कि सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहेगा, जबकि अन्य के लिए मामूली टिकट दर तय की गई है। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए स्थानीय विधायक हरीश जनारथा, मुख्य सचिव और भारी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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