भविष्य की ऊर्जा के लिए भारत-रूस का हाथ: दुनिया का पहला 'एनर्जी-ओ-थॉन' हैकाथॉन हुआ लॉन्च

भारत और रूस ने ब्रिक्स के तहत दुनिया का पहला 'एनर्जी-ओ-थॉन' लॉन्च कर ऊर्जा क्षेत्र में युवा नवाचार की नींव रखी।

Dec 26, 2025 - 20:14
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भविष्य की ऊर्जा के लिए भारत-रूस का हाथ: दुनिया का पहला 'एनर्जी-ओ-थॉन' हैकाथॉन हुआ लॉन्च

लखनऊ: भारत और रूस के बीच कूटनीतिक संबंधों ने ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के बाद, दोनों देशों ने आपसी भरोसे को तकनीक से जोड़ते हुए ब्रिक्स (BRICS) ढांचे के तहत दुनिया का पहला द्विपक्षीय ऊर्जा हैकाथॉन ‘एनर्जी-ओ-थॉन’ सफलतापूर्वक शुरू किया है।

गो-ब्रिक्स बिजनेस फोरम और राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी (RGIPT) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह पहल अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को समझौतों से आगे बढ़ाकर युवा दिमागों के साझा नवाचार तक ले गई है। इस हैकाथॉन का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र की वैश्विक और वास्तविक चुनौतियों का डिजिटल समाधान खोजना है।

पायलट चरण में भारत के 250 और रूस के 100 मेधावी विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इसमें रूस की प्रतिष्ठित संस्थाएं जैसे 'हायर स्कूल ऑफ पेट्रोलियम' और 'मॉस्को पॉलिटेक्निक' के साथ-साथ बायर बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों ने भी गहरी रुचि दिखाई है। यह आयोजन महज एक शैक्षणिक अभ्यास नहीं, बल्कि भविष्य के ऊर्जा स्टार्टअप्स की आधारशिला है।

ब्रिक्स इंटरनेशनल फोरम की चेयरपर्सन सुश्री पूर्णिमा आनंद के अनुसार, यह सहयोग वैज्ञानिक और डिजिटल दिशा में एक नया मील का पत्थर है। आगामी मार्च 2026 में इसके दूसरे चरण (ऑनलाइन आइडियाथॉन) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें रूसी डिजिटल प्लेटफॉर्म 'डियोन' के माध्यम से लगभग 7,000 विद्यार्थी संयुक्त टीमों के रूप में काम करेंगे। दीर्घकालिक लक्ष्य इस नेटवर्क को 50,000 इनोवेटर्स तक पहुँचाने का है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. अमृतांशु शुक्ला ने इसे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया। चुनी गई टीमों को न केवल वैश्विक मंच मिलेगा, बल्कि उन्हें शैक्षणिक आदान-प्रदान और उद्योग जगत से जुड़ने के सीधे अवसर प्राप्त होंगे।

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