Apollo Hospital Vice President उपासना कामिनेनी ने जगाई आध्यात्मिक स्वास्थ्य की नई अलख
उपासना कामिनेनी ने मंदिरों की भूमि को योग और हीलिंग केंद्रों में बदलकर भारत का 'हैप्पीनेस इंडेक्स' सुधारने का अनूठा प्रस्ताव दिया।
उपासना का मानना है कि मंदिर ऐतिहासिक रूप से केवल पूजा के केंद्र नहीं, बल्कि समाज के सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य के स्तंभ रहे हैं। अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि हम अपनी प्राचीन विरासत को आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान (Wellness Science) के साथ जोड़ दें, तो भारत के 'बीमारी के बोझ' (Disease Burden) को काफी कम किया जा सकता है।
सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक स्वास्थ्य का संगम उनका यह विजन तीन मुख्य बिंदुओं पर आधारित है:
समग्र कल्याण: मंदिर परिसर में ध्यान और योग केंद्रों की स्थापना।
सामुदायिक उपचार: सामूहिक प्रार्थना और आध्यात्मिक सत्रों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता।
हैप्पीनेस कोटिएंट: आध्यात्मिक शांति के जरिए नागरिकों के खुशी के स्तर में वृद्धि।
उपासना ने इसे भारत के लिए एक “आहा मोमेंट” करार दिया है। उनका तर्क है कि धर्म और स्वास्थ्य को अलग-अलग देखने के बजाय, इन्हें एक सूत्र में पिरोना चाहिए। यह पहल न केवल मंदिरों की भूमि का सार्थक उपयोग सुनिश्चित करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़ते हुए एक स्वस्थ जीवनशैली प्रदान करेगी।
यह विचार परंपराओं को चुनौती देने वाला लग सकता है, लेकिन यह भारत के 'विश्व गुरु' बनने के सपने की ओर एक व्यावहारिक कदम है। अब चर्चा इस बात पर है कि क्या प्रशासन और समाज इस क्रांतिकारी सोच को धरातल पर उतारने के लिए तैयार है।
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