मथुरा बीएसए की कार्यप्रणाली पर गहराया विवाद: बिना जांच निलंबन और बहाली के खेल पर बिफरीं मंत्री संदीप सिंह
मथुरा में शिक्षक निलंबन प्रकरण पर घिरीं बीएसए रतन कीर्ति। मंत्री संदीप सिंह ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश।
मथुरा (सुमित गोस्वामी): उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री और मथुरा जनपद के प्रभारी मंत्री संदीप सिंह के दौरे के दौरान शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला नौहझील के सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद के विवादित निलंबन और फिर आनन-फानन में हुई बहाली से जुड़ा है, जिसने विभाग की साख पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
विगत दिनों भाजपा नेता दुर्गेश प्रधान की शिकायत पर बीएसए रतन कीर्ति ने प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद को विद्यार्थियों से नमाज पढ़वाने के आरोप में रातों-रात निलंबित कर दिया था। आरोप था कि शिक्षक बच्चों को धार्मिक गतिविधियों के लिए बाध्य कर रहे थे। हालांकि, बिना किसी प्रारंभिक जांच के की गई इस कार्रवाई का स्थानीय ग्रामीणों, अभिभावकों और साथी शिक्षकों ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
बढ़ते दबाव के बीच बीएसए ने जांच समिति गठित की। समिति ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों को पूरी तरह निराधार और फर्जी पाया। इसके बाद शिक्षक को बहाल तो कर दिया गया, लेकिन "पहले सस्पेंशन, फिर रेस्टोरेशन" के इस खेल ने जिले की राजनीति गर्मा दी है। चर्चा है कि बीएसए अपने निर्णयों पर अडिग रहने के बजाय सोशल मीडिया पर सफाई देने में अधिक व्यस्त रहती हैं।
मथुरा आगमन पर जब मीडिया ने बीएसए रतन कीर्ति से इस प्रकरण पर सीधा सवाल किया, तो वह असहज नजर आईं और बिना जवाब दिए वहां से निकल गईं। इस पर संज्ञान लेते हुए मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि विभाग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच कराने की घोषणा की है।
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