वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय के प्रयागराज केंद्र में 'डिजिटल युग में हिंदी' पर विचार-विमर्श: तकनीक ने दिलाई वैश्विक पहचान, संवाद का सबसे सशक्त माध्यम बनी हिंदी

वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय के प्रयागराज केंद्र में 'डिजिटल युग में हिंदी' विषय पर संगोष्ठी आयोजित। विशेषज्ञों ने तकनीक और AI के दौर में हिंदी के वैश्विक विस्तार पर दिए विचार।

Sep 17, 2026 - 21:00
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वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय के प्रयागराज केंद्र में 'डिजिटल युग में हिंदी' पर विचार-विमर्श: तकनीक ने दिलाई वैश्विक पहचान, संवाद का सबसे सशक्त माध्यम बनी हिंदी

प्रयागराज। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र प्रयागराज में 'हिंदी माह' के तहत कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा के संरक्षण में ‘डिजिटल युग में हिंदी’ विषय पर एक गरिमामयी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सोशल मीडिया और डिजिटल संचार माध्यमों के दौर में हिंदी की बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अमित मालवीय ने कहा कि डिजिटल क्रांति ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए नए और असीम दरवाजे खोले हैं। इंटरनेट पर क्षेत्रीय भाषाओं की सामग्रियों का हिंदी रूपांतरण तेजी से हो रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा यूनिकोड के मानकीकरण और संवर्धन से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी में गुणवत्तापूर्ण कंटेंट बनाना बेहद आसान हुआ है, जिससे हिंदी आज वैश्विक संवाद का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।

क्षेत्रीय केंद्र के अकादमिक निदेशक प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि डिजिटल माध्यमों ने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है। आज ब्लॉग, पॉडकास्ट, डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्रों में हिंदी का प्रभुत्व बढ़ा है। उन्होंने वैश्विक मंच पर हिंदी की साख और मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक मौलिक सामग्री अपलोड करने पर जोर दिया और डिजिटल दुनिया पर एक कविता का पाठ भी किया।

संगोष्ठी में स्वागत वक्तव्य देते हुए स्त्री अध्ययन विभाग की सह-आचार्य डॉ. सुप्रिया पाठक ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि संवाद की आत्मा है। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. विजया सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अख्तर आलम ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. अवंतिका शुक्ला, डॉ. आशा मिश्रा, डॉ. मिथिलेश कुमार तिवारी, डॉ. यशार्थ मंजुल समेत विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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