उठाई मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट की आवाज, मुकदमों की बढ़ती संख्या पर जताई चिंता
कानपुर में डॉक्टरों ने प्रेसवार्ता कर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस पर चर्चा की; अनावश्यक मुकदमों पर जताई चिंता।
कानपुर। चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ती कानूनी अड़चनों और डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज हो रहे आपराधिक मुकदमों को लेकर चिकित्सा जगत में भारी आक्रोश है। इस गंभीर विषय पर बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. ए.के. आर्या और मेडिकल लीगल प्रोटेक्शन के अध्यक्ष डॉ. जे.के. गुप्ता ने एक साझा प्रेसवार्ता आयोजित की।
एक वर्ष में 75 हजार मुकदमे: चौंकाने वाले आँकड़े
प्रेसवार्ता के दौरान डॉ. जे.के. गुप्ता ने बताया कि बीते एक वर्ष में देशभर में लगभग 75,000 डॉक्टरों पर विभिन्न अदालतों और उपभोक्ता फोरम में मुकदमे दर्ज हुए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति न केवल चिकित्सा जगत को आहत कर रही है, बल्कि इससे डॉक्टरों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
एक्ट होने के बावजूद सुरक्षा का अभाव
डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने स्पष्ट किया कि देश के अधिकांश राज्यों में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू है। इस कानून के तहत:
अस्पतालों या क्लीनिकों में हिंसा करने पर 3 साल की कैद और 50,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
शिकायत के बावजूद पुलिस अक्सर तोड़फोड़ के मामलों में इस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी करती है।
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