प्रो. देवासिस की शोध पुस्तकों को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता
प्रो. देवासिस प्रधान की शोध पुस्तकों को विली और स्प्रिंगर जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने दी वैश्विक मान्यता, बढ़ाया भारत का मान।
बरेली : आत्मनिर्भर भारत के विजन को तकनीकी धरातल पर उतारते हुए भारतीय शोधकर्ताओं ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आचार्य संस्थान के सहायक निदेशक (अनुसंधान) प्रो. देवासिस प्रधान द्वारा संपादित शोध पुस्तकों को विली, स्प्रिंगर और कैम्ब्रिज स्कॉलर्स पब्लिशिंग जैसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित प्रकाशन समूहों ने वैश्विक स्तर पर प्रकाशित किया है।
तकनीकी नवाचार और वैश्विक मानक
इन शोध कार्यों को स्कोपस (Scopus) और वेब ऑफ साइंस जैसे अंतरराष्ट्रीय इंडेक्सिंग प्लेटफॉर्म्स में स्थान मिलना, भारतीय अनुसंधान की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर वैश्विक मुहर लगाता है। प्रो. प्रधान के नेतृत्व में तैयार ये पुस्तकें भविष्य की तकनीकों जैसे:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और संज्ञानात्मक कंप्यूटिंग
- 5G एवं 6G संचार नेटवर्क
- स्मार्ट सिटीज और सुरक्षित नेटवर्क अवसंरचना
- हरित संचार (Green Communication) और सतत स्वास्थ्य प्रणालियाँ
जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। ये शोध पत्र केवल अकादमिक दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि 'डिजिटल इंडिया' और 'स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर' की दिशा में व्यावहारिक ब्लूप्रिंट का काम करेंगे।
प्रो. देवासिस प्रधान ने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम को देते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य भारतीय ज्ञान को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में वर्षा उमेश घाटे, सचिन कदम, अनुपम मुखर्जी, अनीता सरदार पाटिल और राकेश कुमार दीक्षित सहित दर्जनों शोधकर्ताओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय शोधकर्ता अब वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए स्वदेशी नवाचार का उपयोग कर रहे हैं। आचार्य संस्थान की यह शोध संस्कृति न केवल देश की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दे रही है कि भविष्य की तकनीक का नेतृत्व अब भारत से हो रहा है।
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