स्थानांतरण के चार महीने बाद भी जारी हुआ मृत्यु प्रमाण पत्र: मंझनपुर के पिंडरा सहावनपुर में विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कौशाम्बी के पिंडरा सहावनपुर में स्थानांतरण के चार महीने बाद पूर्व पंचायत अधिकारी द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने पर उठे गंभीर सवाल।
(एडवोकेट अजय पण्डा)
कौशाम्बी। मंझनपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत पिंडरा सहावनपुर में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि 15 अप्रैल 2026 से ग्राम विकास अधिकारी अरविन्द सिंह की तैनाती होने के बावजूद 18 अगस्त 2026 को पूर्व ग्राम पंचायत अधिकारी रविकांत सिंह के नाम से एक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब अप्रैल में ही रविकांत सिंह का स्थानांतरण हो चुका था और ग्राम पंचायत का जन्म-मृत्यु पंजीयन रजिस्टर वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी के पास था, तो आखिर पूर्व अधिकारी के स्तर से मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ?
बताया जा रहा है कि 18 अगस्त को चंदीलाल प्रानपाल सरोज पुत्र प्रानपाल, माता फुलकलिया के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। नियमानुसार जन्म-मृत्यु पंजीयन की प्रक्रिया में संबंधित रजिस्टर में मृत्यु का विवरण दर्ज होने के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। ऐसे में यह पूरा मामला जांच का विषय बन गया है कि वर्तमान में पंजीयन रजिस्टर किस अधिकारी के पास था और उसमें प्रविष्टि किसके द्वारा की गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राम पंचायत में 15 अप्रैल 2026 से अरविन्द सिंह की तैनाती थी, तो चार महीने बाद 18 अगस्त को पूर्व ग्राम पंचायत अधिकारी रविकांत सिंह के नाम से प्रमाण पत्र निर्गत होने की स्थिति कैसे बनी? क्या इसके लिए पूर्व अधिकारी को कोई अधिकृत अधिकार दिया गया था? यदि नहीं, तो प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया किस आधार पर अपनाई गई?
मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर स्थानांतरण के बाद भी पूर्व ग्राम पंचायत अधिकारी का पिंडरा सहावनपुर की व्यवस्था से कितना जुड़ाव बना हुआ था और किस परिस्थिति में उनके नाम से प्रमाण पत्र जारी हुआ, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस संबंध में जिलाअधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी से बात करने की कोशिश किया गया लेकिन फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा l अब देखना यह है कि जांच में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की वास्तविक प्रक्रिया, पंजीयन रजिस्टर में हुई प्रविष्टि और प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले व्यक्ति की भूमिका सामने आती है या नहीं। फिलहाल इस मामले ने ग्राम पंचायतों में जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था की निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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