कानपुर: राजनीतिक भागीदारी के लिए चुनाव लड़ेगी राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी, प्रांतीय अधिवेशन में हुंकार
कानपुर में राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी का प्रांतीय अधिवेशन। राजनीतिक भागीदारी के लिए चुनाव लड़ने और ₹5000 पेंशन के लिए आंदोलन का ऐलान
कानपुर : "जब तक दिव्यांगजनों को राजनीतिक भागीदारी नहीं मिलेगी और वे उच्च सदन में नहीं पहुँचेंगे, तब तक उनके अधिकारों के लिए मजबूत कानून नहीं बन सकते।" यह बात राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने कानपुर में आयोजित पार्टी के प्रांतीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कही। इस अधिवेशन में पार्टी ने अपने हक और सम्मान के लिए चुनावी मैदान में उतरने के साथ-साथ एक बड़े आंदोलन का शंखनाद कर दिया है।
सौ फीसदी गारंटी और ₹5000 पेंशन के लिए मचेगा रार
अधिवेशन में दिव्यांगों के हितों को लेकर कई महत्वपूर्ण और कड़े निर्णय लिए गए:
- चुनावी भागीदारी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सभी जनपदों से प्रत्याशियों की सूची मांगी गई है, जिसके बाद जल्द ही उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की जाएगी। पार्टी 'मजबूत के बजाय कमजोर को मजबूत बनाने' के नारे के साथ जनता से वोट की अपील करेगी।
- अधिकारों के लिए कानून: दिव्यांगजन अधिनियम 2016 को जमीनी स्तर पर लागू कराने और दिव्यांगों को नौकरी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा रोटी, कपड़ा व मकान की 100% गारंटी के लिए 'सामाजिक समानता कानून' बनाने की मांग की गई।
- मासिक पेंशन आंदोलन: दिव्यांगों की मासिक पेंशन को बढ़ाकर ₹5000 करने के लिए सड़क पर उतरकर संघर्ष करने का निर्णय लिया गया।
अधिवेशन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी (CJP) के आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया गया। तय रणनीति के अनुसार, राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी के पदाधिकारी 5 जुलाई को जंतर-मंतर जाकर अपना समर्थन दर्ज कराएंगे। इसके बाद जनपद स्तर पर एक दिवसीय सांकेतिक अनशन के माध्यम से सरकार को जगाने का प्रयास किया जाएगा। इसी क्रम में संगठन का विस्तार करते हुए महोबा के मुकेश कुमार को प्रदेश महासचिव नियुक्त किया गया।
महाराष्ट्र से पधारे विशिष्ट अतिथि व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धनराज नीना गायकवाड़ ने कहा कि देश भर में दिव्यांगों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकार पेंशन के नाम पर महज 'भीख' दे रही है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है। हमें हर हाल में अपनी सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी छीननी होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश अध्यक्ष आनंद तिवारी ने साफ शब्दों में कहा कि बिना संघर्ष के अधिकार नहीं मिलने वाले, अब आर-पार की लड़ाई होगी। वहीं, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अल्पना कुमारी ने दिव्यांग महिलाओं की पीड़ा साझा करते हुए कहा कि परिवार और समाज आज भी उन्हें बोझ समझता है। ऐसे में महिलाओं को खुद आगे आकर राजनीति के मैदान में उतरना होगा। कानपुर जिला अध्यक्ष राहुल कुमार ने भी स्थानीय स्तर पर प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ गहरी नींद से जगाने वाले आंदोलन की बात कही।
इस प्रांतीय अधिवेशन में मुख्य रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार, धनराज नीना गायकवाड़, आनंद तिवारी, अल्पना कुमारी, मुकेश कुमार भारती, मंडल अध्यक्ष अशोक कुमार, गुड्डी दीक्षित, वैभव दीक्षित, गौरव कुमार, गोमती वर्मा, राम जानकी, किशोरी, आशीष, सरला और सांबरा खातून समेत भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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