गोण्डा में देवीपाटन मण्डल के साहित्यकारों का महाकुंभ, 'चंडीदत्त रचना समग्र' का लोकार्पण
गोण्डा में साहित्य एवं संस्कृति ज्ञानकोश कार्यशाला का आयोजन। डॉ. सूर्यपाल सिंह ने भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर दिया जोर।
गोण्डा: "यदि भाषा लुप्त हो गई, तो हमारी संस्कृति का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा।" यह विचार प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सूर्यपाल सिंह ने श्री लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के ललिता सभागार में व्यक्त किए। अवसर था हिन्दी विभाग, 'भविष्य भूमि' एवं 'पूर्वापर' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'साहित्य, संस्कृति एवं ज्ञानकोश निर्माण' कार्यशाला का।
कार्यशाला में देवीपाटन मण्डल के चारों जनपदों के साहित्यकारों ने शिरकत की। इस दौरान प्रख्यात पत्रकार व साहित्यकार स्वर्गीय चंडीदत्त शुक्ल 'सागर' की कालजयी रचनाओं के संग्रह 'चंडीदत्त रचना समग्र' का भव्य लोकार्पण किया गया। पुस्तक का संपादन शैलेन्द्र मिश्र 'शून्यम्' और राजेश ओझा द्वारा किया गया है।
सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष शैलेन्द्र नाथ मिश्र 'शून्यम्' ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि प्रस्तावित ज्ञानकोश में अवध क्षेत्र की संस्कृति, लोक साहित्य और इतिहास के अनछुए पहलुओं को संकलित किया जाएगा। डॉ. जय शंकर तिवारी ने अवधी संस्कृति की सौंदर्य चेतना को अक्षुण्ण रखने के लिए निष्पक्ष तथ्य संकलन पर जोर दिया।
कार्यक्रम में महन्त अंकित दास ने संत बनादास के साहित्य संरक्षण का आह्वान किया। इस वैचारिक समागम में अतुल कुमार सिंह, शिवाकांत मिश्र 'विद्रोही', और सतीश आर्य सहित बड़ी संख्या में विद्वानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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