गुमनाम नायक महावीर नट की जयंती पर उमड़ा जनसैलाब: स्वाधीनता आंदोलन में उनके योगदान को किया गया याद
अम्बेडकरनगर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महावीर नट की जयंती मनाई गई। वक्ताओं ने उनके गुप्तचर योगदान और बलिदान को याद किया।
अम्बेडकरनगर। भारतीय स्वाधीनता संग्राम की नींव उन असंख्य बलिदानों पर टिकी है, जिनमें से कई नाम इतिहास के पन्नों में ओझल रहे। ऐसे ही एक महान क्रांतिकारी और ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाने वाले महावीर नट की जयंती जनपद के नैली गांव में उनके समाधि स्थल पर अत्यंत श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
क्रांतिकारियों के 'सूचना तंत्र' थे महावीर नट
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राम कुमार पाल ने महावीर नट को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महावीर नट जैसे जमीनी नायकों ने ही ब्रिटिश सेना के भीतर की सूचनाएं क्रांतिकारियों तक पहुंचाकर आजादी की मशाल को जलाए रखा।
ब्रिटिश सेना की जासूसी और गुप्त रणनीति
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने महावीर नट के अदम्य साहस पर प्रकाश डाला। बताया गया कि:
- वे गुप्त रूप से ब्रिटिश सेना की गतिविधियों और उनकी आवाजाही पर कड़ी नजर रखते थे।
- एकत्रित सूचनाओं को अत्यंत जोखिम उठाकर क्रांतिकारी समूहों तक पहुँचाते थे।
- उनके इस गुप्तचर कार्य ने कई मौकों पर अंग्रेजी सेना की रणनीतियों को विफल करने में मदद की।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के वंशज शंकर नट और राम लखन नट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्र, ब्लॉक अध्यक्ष अकबरपुर मो. जियाउद्दीन अंसारी सहित आकाश वर्मा, मनजीत राजभर और कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। जिला कांग्रेस प्रवक्ता अवधेश कुमार मिश्र "बब्लू" ने बताया कि समाधि स्थल पर समाज के हर वर्ग ने पुष्प अर्पित कर महावीर नट के बलिदान को नमन किया।
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