आस्था का महासागर: मौनी अमावस्या पर 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में रचा नया इतिहास

मौनी अमावस्या 2026: प्रयागराज संगम में 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, टूटे भीड़ के पुराने सभी रिकॉर्ड।

Jan 18, 2026 - 21:35
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आस्था का महासागर: मौनी अमावस्या पर 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में रचा नया इतिहास

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी प्रयागराज में रविवार को आस्था का वह विराट स्वरूप देखने को मिला, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। माघ मेला 2026 के सबसे महत्वपूर्ण पर्व 'मौनी अमावस्या' पर त्रिवेणी के तट पर भक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा कि अब तक के तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस पावन अवसर पर करीब 4 करोड़ 52 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

संगम की रेती पर शनिवार रात से ही जनसैलाब उमड़ना शुरू हो गया था। प्रशासन के अनुसार, अमावस्या तिथि लगने के साथ ही शनिवार को ही लगभग 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान कर लिया था। रविवार को सूर्योदय के साथ ही कोहरे की चादर को चीरते हुए श्रद्धालुओं की कतारें लंबी होती गईं। शाम 4:00 बजे तक आंकड़ा 3.80 करोड़ को पार कर चुका था, जो देर शाम तक 4.52 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुँच गया। यह संख्या न केवल इस वर्ष के माघ मेले की सबसे बड़ी संख्या है, बल्कि यह भविष्य के महाकुंभ के लिए एक बड़ा संकेत भी है।

इतनी विशाल भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने 'वॉटर-टू-स्काई' निगरानी की। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, और मेलाधिकारी ऋषिराज सहित जिले के आला अफसर दिनभर मेला क्षेत्र में भ्रमणशील रहे। संगम नोज, दशाश्वमेध घाट, राम घाट, अरैल और झूंसी सहित कुल 24 घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा और सुविधा के विशेष इंतजाम किए गए थे। एटीएस और पीएसी के साथ पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों ने भीड़ प्रबंधन को सुचारू बनाए रखा।

श्रद्धालुओं में न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के कोने-कोने—कन्याकुमारी से कश्मीर और कच्छ से कामरूप तक के लोग शामिल थे। श्री राधा आध्यात्मिक सत्संग समिति की अध्यक्ष डॉ. राधाचार्या ने इस दृश्य को अभूतपूर्व बताते हुए कहा, "मौनी अमावस्या 2026 का यह स्नान पर्व सिद्ध कर गया कि सनातन आस्था के आगे दुनिया की हर सीमा बौनी है।" संगम तट पर कहीं मौन साधक अपनी साधना में लीन थे, तो कहीं भजन-कीर्तन की गूँज सुनाई दे रही थी।

प्रयागराज की ओर आने वाली सभी सड़कों पर केवल 'हर-हर गंगे' की गूँज थी। श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ संगम नोज पर देखी गई, जबकि कल्पवासी क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। रात भर चले स्नान के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। प्रशासन के अनुमान के अनुसार, स्नान का सिलसिला सोमवार सुबह तक जारी रहने की उम्मीद है।

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