राम मंदिर दान चोरी मामले में वाराणसी की आउटसोर्सिंग एजेंसी की भर्ती प्रक्रिया जांच के दायरे में0
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में वाराणसी की आउटसोर्सिंग एजेंसी और एसबीआई की भर्ती प्रक्रिया जांच के दायरे में आई।
अयोध्या — अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के दान की चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश अब वाराणसी से जुड़ गई है। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि मंदिर के गर्भगृह और दान पात्रों से नकदी गायब करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से छह कर्मचारी वाराणसी की एक निजी आउटसोर्सिंग मैनपावर कंपनी 'सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज' के पेरोल पर काम कर रहे थे।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों का प्रबंधन करने वाले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इस निजी एजेंसी को मंदिर परिसर में नकदी की गिनती और प्रबंधन के लिए जनशक्ति (स्टाफ) की आपूर्ति करने का ठेका दिया था। वाराणसी लिंक सामने आने के बाद अब आरोपियों की भर्ती प्रक्रिया, उनके बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और सुरक्षा मंजूरी की गहन जांच की जा रही है कि क्या बिना उचित पुलिस सत्यापन के इन्हें इतनी संवेदनशील जगह पर तैनात किया गया था।
सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के निदेशक गौरव सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी केवल एसबीआई की अयोध्या शाखा को स्टाफ प्रदान करने वाली वेंडर थी। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय बैंक प्रबंधन द्वारा दिए गए निर्देशों और नामों के आधार पर ही इन कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। उन्होंने कहा, "हमारा काम सिर्फ मैनपावर देना था, बैंक ने उन्हें अंदर क्या जिम्मेदारी दी, यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं था।"
एसआईटी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी सीसीटीवी कैमरों के सामने मानव श्रृंखला (ह्यूमन शील्ड) बनाकर कैश रूम से दैनिक चढ़ावे की चोरी करते थे। पुलिस अब तक आरोपियों के पास से ₹80 लाख की भारतीय नकदी, अमेरिकी डॉलर, और सोने-चांदी के आभूषण बरामद कर चुकी है। जांच दल अब इस बात की भी ऑडिट कर रहा है कि बिना जेब वाली वर्दी (पॉकेटलेस यूनिफॉर्म) और दैनिक तलाशी के कड़े नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया।0
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