सैमसंग ने यूपी के युवाओं को दिया 'डिज़ाइन थिंकिंग' का मंत्र: प्रोडक्ट से पहले समझें समस्या
सैमसंग ने यूपी में युवाओं को सिखाया डिज़ाइन थिंकिंग का पाठ, ताकि वे रीयल-वर्ल्ड समस्याओं के सटीक तकनीकी समाधान खोज सकें।
लखनऊ : अक्सर देखा जाता है कि इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों के छात्र महीनों की कड़ी मेहनत के बाद एक शानदार प्रोटोटाइप तो तैयार कर लेते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि समाज में उस समस्या का कोई वजूद ही नहीं था। छात्रों की इसी सोच को बदलने के लिए सैमसंग इंडिया ने एक अनूठी पहल की है। 'सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026' प्रोग्राम के तहत ग्रेटर नोएडा के जीएनआईओटी (GNIOT) संस्थान में एक विशेष 'डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप' का आयोजन किया गया। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस वर्कशॉप में उत्तर प्रदेश भर के उभरते इनोवेटर्स ने हिस्सा लिया।
इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य युवाओं को कोडिंग या प्रोडक्ट डेवलपमेंट से पहले एंटरप्रेन्योरशिप का सबसे बुनियादी नियम सिखाना था: समाधान खोजने से पहले समस्या को गहराई से समझें। इस प्रोग्राम के जरिए 14 से 22 वर्ष के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण की स्थिरता जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
वर्कशॉप में शामिल छात्रों ने माना कि इस अनुभव ने उनका नज़रिया बदल दिया है। जीएनआईओटी के छात्र कबीर सिंह और रवि कुशवाहा के अनुसार, इस सेशन से उन्हें यह समझ आया कि कोई भी आइडिया सिर्फ नया होने से अच्छा नहीं हो जाता, बल्कि यह देखना ज़रूरी है कि क्या वह क्लासरूम के बाहर की असली चुनौतियों को हल कर पा रहा है या नहीं।
सैमसंग का यह प्रोग्राम इस बार देश के 100 शहरों में आयोजित किया जा रहा है, जहाँ युवाओं को ट्रेनिंग, मेंटरशिप और प्रोटोटाइपिंग सपोर्ट मिल रहा है। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शीर्ष चार विजेता टीमों को आईआईटी दिल्ली में अपने आइडिया को विकसित करने के लिए ₹2 करोड़ का इनक्यूबेशन ग्रांट दिया जाएगा। इच्छुक युवा इसके लिए 3 जुलाई, 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
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