बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज में कबाड़ के मॉडलों ने जगाया पढ़ाई का नया जुनून
विज्ञान शिक्षक हरिश्चन्द्र सिंह की अनोखी पहल ने बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज में पढ़ाई की तस्वीर बदल दी। खेल-खेल में सीखने के नवाचार से बच्चों की उपस्थिति और परीक्षा परिणाम दोनों में अभूतपूर्व सुधार आया।
लखनऊ : बख्शी का तालाब स्थित इंटर कॉलेज में कभी कक्षाएँ तो शांत रहती थीं, लेकिन विद्यार्थियों के चेहरों से सीखने की उत्सुकता नदारद थी। किताबें और शिक्षक दोनों मौजूद थे, परंतु पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के कारण बच्चे पढ़ाई से ऊबने लगे थे। इसका सीधा असर उनकी उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ रहा था।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही विज्ञान अध्यापक हरिश्चन्द्र सिंह ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने माना कि केवल किताबी ज्ञान बच्चों में जिज्ञासा पैदा नहीं कर सकता, इसके लिए कुछ व्यावहारिक और नए प्रयोग आवश्यक हैं। उन्होंने कक्षा में "छोटा नवाचार, बड़ा बदलाव" की सोच के साथ काम शुरू किया।
हरिश्चन्द्र सिंह ने बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए कबाड़ और बेकार पड़ी वस्तुओं का उपयोग कर विज्ञान के मॉडल बनाने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा कठिन अवधारणाओं को समझाने के लिए शब्दों के आकर्षक चित्रकार्ड तैयार किए गए और कक्षा के एक हिस्से में "खेल-खेल में सीखो" कोना स्थापित किया गया।
इन छोटे-छोटे प्रयासों ने जादू की तरह काम किया। जो बच्चे पहले शांत और निरुत्साहित रहते थे, अब वे खुद आगे आकर सवाल पूछने लगे और सहपाठियों के साथ मिलकर नए मॉडल बनाने लगे। विद्यालय में लगातार अनुपस्थित रहने वाले बच्चों की हाजिरी में भी भारी इजाफा हुआ।
इस बदलाव को देखकर अभिभावक और क्षेत्रीय नागरिक बेहद प्रभावित हैं। उनका कहना है कि विद्यालय का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका है। वार्षिक परीक्षा में विद्यार्थियों का परिणाम तो शानदार रहा ही, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि बच्चों के मन से पढ़ाई का डर खत्म हुआ और वे अब सीखने की प्रक्रिया का भरपूर आनंद ले रहे हैं।
सीख - नवाचार बड़ा खर्च नहीं बड़ा सोच है। छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
(हरिश्चन्द्र सिंह)
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)