जर्जर मकानों की शिफ्टिंग योजना पर गांव की राजनीति हावी, CDO के आदेश को ठेंगा दिखा रहे BDO

कौशांबी में भारी बारिश के बीच जर्जर कच्चे मकानों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के योगी सरकार के आदेश बेअसर। BDO और प्रधान की मनमानी से गरीब परिवार खतरे में।

Sep 27, 2026 - 21:53
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जर्जर मकानों की शिफ्टिंग योजना पर गांव की राजनीति हावी, CDO के आदेश को ठेंगा दिखा रहे BDO

कौशांबी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा भारी बारिश को लेकर जारी 'ऑरेंज अलर्ट' के तहत जर्जर कच्चे मकानों में रह रहे गरीब परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने का निर्देश कौशांबी जनपद में पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जिले में कच्चे मकानों की दीवारें ढह रही हैं और गरीब-मजलूम परिवार खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद कौशांबी में जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी केवल खानापूर्ति और झूठी रिपोर्टिंग में जुटे हुए हैं।

जिले में गांव की स्थानीय राजनीति और ग्राम प्रधानों की मनमानी इस कदर हावी है कि पंचायत सचिव से लेकर खंड विकास अधिकारी (BDO) तक गरीबों की सुरक्षा की अनदेखी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिल पाने के कारण कई परिवार जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। पूर्व में मकान गिरने से कई लोगों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले को लेकर जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।

नेवादा के बरियांवा में CDO के आदेश की अवहेलना:
प्रशासनिक लापरवाही का ताजा मामला नेवादा विकासखंड के ग्राम पंचायत बरियांवा से सामने आया है। यहां के निवासी बृजेंद्र केसरवानी के 100 वर्ष पुराने कच्चे घर की दो दीवारें हालिया बारिश में ढह गईं, जिसमें उनके घर का सामान मलबे में दब गया। बचा हुआ एक कमरा भी इतना जर्जर है कि उसकी छत से पानी टपक रहा है। जान माल के खतरे को देखते हुए पीड़ित ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) से गुहार लगाई। CDO ने BDO नेवादा को पीड़ित परिवार को तुरंत पंचायत भवन या अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए।

हालांकि, BDO नेवादा ने आदेश का पालन करने के बजाय CDO को ही यह झूठी रिपोर्ट भेज दी कि पीड़ित परिवार शिफ्ट होने को तैयार नहीं है। जबकि पीड़ित परिवार बारिश के बीच खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।

तहसील प्रशासन भी बेपरवाह, मुआवजे का इंतजार:
यह कहानी सिर्फ बृजेंद्र की नहीं है, बल्कि पूरे कौशांबी जिले में दर्जनों ऐसे परिवार हैं जो जर्जर मकानों में जिंदगी दांव पर लगाकर दिन काट रहे हैं। हद तो यह है कि बृजेंद्र का घर गिरने के बाद भी तहसील प्रशासन की ओर से अब तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर बारिश के कारण कोई बड़ा हादसा या जनहानि होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या CDO का आदेश न मानने वाले BDO नेवादा पर कोई कठोर कार्रवाई होगी या फिर सरकारी निर्देश सिर्फ कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहेंगे?

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