झांसी का 140 साल पुराना पारीछा बांध बनेगा विश्व धरोहर, फ्रांस में मिलेगा अंतरराष्ट्रीय सम्मान
विवरण (35 शब्द): झांसी का ऐतिहासिक पारीछा बांध अब वैश्विक पहचान की ओर बढ़ रहा है। करीब 140 साल पुरानी इस सिंचाई संरचना को WHIS-2026 सम्मान मिलेगा, जिससे बुंदेलखंड में पर्यटन और अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गौरव की बड़ी खबर सामने आई है। झांसी का करीब 140 वर्ष पुराना पारीछा बांध अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने जा रहा है। अंग्रेजों के दौर में बेतवा नदी पर निर्मित इस ऐतिहासिक सिंचाई संरचना को इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (ICID) ने ‘वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर’ यानी WHIS के लिए चुना है। इस उपलब्धि के तहत पारीछा बांध को WHIS अवॉर्ड-2026 से सम्मानित किया जाएगा।
यह सम्मान आगामी 14 अक्टूबर 2026 को फ्रांस के मार्सेई में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय समारोह में प्रदान किया जाएगा। समारोह में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस दौरान पारीछा बांध की ऐतिहासिक विरासत, इंजीनियरिंग क्षमता और बुंदेलखंड के विकास में इसके योगदान को दुनिया के सामने रखा जाएगा।
बेतवा नदी पर बना पारीछा बांध झांसी से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे बुंदेलखंड की पुरानी और महत्वपूर्ण सिंचाई संरचनाओं में गिना जाता है। करीब 140 वर्षों से यह बांध क्षेत्र के खेतों तक बेतवा नदी का पानी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
निर्माण के शुरुआती दौर में बांध की जल संग्रहण क्षमता लगभग 105 मिलियन क्यूबिक मीटर थी। हालांकि लंबे समय तक गाद जमा होने के कारण वर्तमान में इसकी क्षमता घटकर करीब 78.74 मिलियन क्यूबिक मीटर रह गई है। बांध में 318 गेट हैं, जो अपने समय की इंजीनियरिंग दक्षता और जल प्रबंधन तकनीक का उदाहरण माने जाते हैं।
WHIS की मान्यता मिलने के बाद पारीछा बांध की भूमिका केवल सिंचाई और जल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी। अब इसे बुंदेलखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
मानसून के दौरान बांध के आसपास फैली हरियाली, विशाल जलाशय और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के बाद यहां देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय कारोबार, रोजगार और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिल सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार पारीछा बांध के आधुनिकीकरण और कायाकल्प की दिशा में भी काम कर रही है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत बांध से गाद निकालने के लिए स्लूज बनाए जाने और मौजूदा मैनुअल गेटों को ऑटोमेटिक करने की योजना है।
इन कार्यों से बांध की जल संग्रहण क्षमता को बेहतर करने, संचालन को आसान बनाने और रखरखाव व्यवस्था को आधुनिक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे लंबे समय से क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था में योगदान दे रहे इस ऐतिहासिक बांध को नई तकनीकी मजबूती भी मिलेगी।
फ्रांस में होने वाला WHIS सम्मान समारोह उत्तर प्रदेश के लिए पर्यटन और विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के सामने पारीछा बांध की विशेषताओं को प्रस्तुत किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता बुंदेलखंड के ऐतिहासिक जल ढांचों, प्राकृतिक स्थलों और इंजीनियरिंग विरासत को वैश्विक पर्यटन से जोड़ने का अवसर देती है। इससे उत्तर प्रदेश के हेरिटेज टूरिज्म, इको-टूरिज्म और वेलनेस टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल सकता है।
करीब डेढ़ सदी से बुंदेलखंड की जल जरूरतों को पूरा करने वाला पारीछा बांध अब इतिहास के पन्नों से निकलकर वैश्विक पर्यटन के मंच पर पहुंचने की तैयारी में है। फ्रांस में मिलने वाला WHIS-2026 सम्मान इस ऐतिहासिक संरचना की इंजीनियरिंग विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
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