शिमला में १५० से अधिक इमारतें असुरक्षित घोषित, नगर निगम ने खाली करने का दिया आदेश

शिमला नगर निगम ने मानसून में ढहने के खतरे को देखते हुए १५० से अधिक जर्जर इमारतों को तुरंत खाली करने का निर्देश दिया है।

Jul 16, 2026 - 16:43
Updated: 3 hours ago
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शिमला में १५० से अधिक इमारतें असुरक्षित घोषित, नगर निगम ने खाली करने का दिया आदेश

शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मानसून की भारी बारिश शुरू होते ही जर्जर भवनों का खतरा गहरा गया है। शिमला नगर निगम (SMC) ने सुरक्षा के मद्देनजर शहर की १५० से अधिक इमारतों को असुरक्षित घोषित कर दिया है और उनके मालिकों तथा किरायेदारों को उन्हें तुरंत खाली करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।  

नगर निगम के अनुसार, इनमें से अधिकांश इमारतें लगभग १०० साल से अधिक पुरानी हैं और रहने योग्य नहीं रह गई हैं। ये असुरक्षित भवन शिमला के प्रमुख और घनी आबादी वाले क्षेत्रों जैसे राम बाजार, लक्कड़ बाजार, छोटा शिमला, संजौली, कसुम्पटी और बालूगंज में स्थित हैं। मानसून के दौरान इनके ढहने की आशंका काफी बढ़ गई है, जिससे न केवल इनमें रहने वाले लोगों बल्कि आसपास के निवासियों की जान को भी भारी खतरा बना हुआ है। हाल ही में रुल्दूभट्ठा वार्ड के शांकली में एक पुराने खाली पड़े मकान की दीवार अचानक गिरने से पड़ोस के घरों में डर का माहौल है।

 शिमला नगर निगम के आर्किटेक्ट प्लानर राजेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि जब भी कोई भवन मालिक आवेदन करता है, तो निगम उसकी जांच कर इमारत को असुरक्षित घोषित करता है और उसे खाली करने व गिराने का आदेश जारी करता है। हालांकि, इन खतरनाक इमारतों को गिराने की प्रक्रिया में कानूनी अड़चनें सबसे बड़ा रोड़ा बन रही हैं।

कई मामलों में किरायेदारों ने खाली करने के आदेशों के खिलाफ अदालतों से स्टे (स्थगन आदेश) ले रखा है। इसके अतिरिक्त, शहर में ३० से अधिक ऐसी जर्जर इमारतें हैं जिनके मालिकों का कोई अता-पता नहीं है, जिससे उन पर कार्रवाई करना और भी जटिल हो गया है। प्रशासन ने अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। 

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