बी-पैक्स कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से चरमराई सहकारी व्यवस्था: खाद के लिए भटक रहे किसान, 1 नवंबर से धान खरीद पर भी बड़ा संकट

अम्बेडकरनगर समेत पूरे उत्तर प्रदेश में बी-पैक्स कर्मचारियों की हड़ताल से सहकारी समितियां बंद हैं, जिससे रबी सीजन में खाद की किल्लत और 1 नवंबर से धान खरीद पर संकट मंडरा रहा है।

Oct 27, 2026 - 20:51
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बी-पैक्स कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से चरमराई सहकारी व्यवस्था: खाद के लिए भटक रहे किसान, 1 नवंबर से धान खरीद पर भी बड़ा संकट

अम्बेडकरनगर: उत्तर प्रदेश में बी-पैक्स (सहकारी समितियों) के कर्मचारियों का आंदोलन अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। नियमित कर्मचारी का दर्जा देने और राजकोष से वेतन भुगतान की मांग को लेकर कर्मचारी आर-पार के मूड में हैं और राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन धरना स्थल पर लगातार डटे हुए हैं। इस हड़ताल का सीधा असर अम्बेडकरनगर समेत पूरे प्रदेश के ग्रामीण अंचलों और किसानों पर साफ दिखाई देने लगा है।

जिले की तमाम सहकारी समितियों पर ताले लटकने से उर्वरक वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। वर्तमान में रबी फसलों की बुवाई का महत्वपूर्ण सीजन चल रहा है, ऐसे समय में जरूरत के मुताबिक खाद न मिलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मजबूरन किसानों को निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। यूनियन के जिलाध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार या तो उनकी मांगें पूरी करे या सभी कर्मचारियों से सामूहिक त्यागपत्र ले ले।

कर्मचारियों की इस हड़ताल ने सरकार और प्रशासन की चिंताएं और बढ़ा दी हैं क्योंकि आगामी 1 नवंबर से धान खरीद का महाअभियान शुरू होना है। सहकारी समितियां धान खरीद प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई और समितियों का संचालन सामान्य नहीं हुआ, तो किसानों के पंजीकरण, खरीद अभिलेखों के रखरखाव और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ेगा, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है।

प्रदेशभर में 20 हजार से अधिक कर्मचारियों की नाराजगी का दावा किया जा रहा है। इस मुद्दे पर विपक्षी दल भी सरकार को घेरने में जुट गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों से सीधा जुड़ाव होने के कारण खाद की किल्लत और धान खरीद में बाधा आने से राजनीतिक माहौल भी गरमाने लगा है। ऐसे में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि सरकार बातचीत के जरिए इस गतिरोध को कैसे खत्म करती है ताकि किसानों को समय पर खाद और धान खरीद की सुगम सुविधा मिल सके।

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