एसकेडी ग्रुप ने ‘विसडम वीक’ में हरियाली की अलख जगाई, वृक्षारोपण से मनाया निदेशक का जन्मदिन

SKD Group celebrated Wisdom Week with massive plantation drive, promoting eco-consciousness and sustainable values through education and community participation.

Jul 12, 2025 - 21:06
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एसकेडी ग्रुप ने ‘विसडम वीक’ में हरियाली की अलख जगाई, वृक्षारोपण से मनाया निदेशक का जन्मदिन

लखनऊ। एसकेडी ग्रुप ऑफ एजुकेशन ने अपने वार्षिक कार्यक्रम ‘विसडम वीक’ (7 जुलाई – 12 जुलाई 2025) को इस वर्ष एक नए आयाम पर ले जाते हुए हरियाली और पर्यावरण सुरक्षा को केंद्र में रखा है। इस सप्ताह भर चलने वाले आयोजन की शुरुआत समूह के निदेशक श्री मनीष सिंह के जन्मदिन पर एक भव्य वृक्षारोपण अभियान से हुई, जिसने पर्यावरणीय चेतना को नई दिशा दी।

“पेड़ लगाओ, प्रकृति बचाओ” थीम के साथ एसकेडी ग्रुप ने लखनऊ सहित अपनी सभी शाखाओं में कुल 10,000 से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा और उसे सफलतापूर्वक पूरा भी किया। इस अभियान में छात्रों से लेकर शिक्षकों, गैर-शिक्षण स्टाफ से लेकर अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों तक, सभी ने उत्साह से भाग लिया।

निदेशक श्री मनीष सिंह ने इस अवसर पर कहा, “हमें अपने पूर्वजों से प्रकृति का उपहार मिला था—शुद्ध वायु, स्वच्छ जल और संतुलित मौसम। आज जब हम तकनीक और विकास की बात करते हैं, तो यह भी सोचें कि हम अगली पीढ़ी को क्या सौंपेंगे। हमें विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधना होगा। यदि आज हमने प्लास्टिक छोड़कर पेड़ नहीं अपनाए, तो भविष्य संकट में होगा।”

इस अभियान के अंतर्गत छात्रों ने जागरूकता रैली निकाली, पोस्टर और नारे बनाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया। “हरा भरा भविष्य – यही है हमारा लक्ष्य” जैसे संदेशों के साथ परिसर हरियाली से भर उठा।

एसकेडी ग्रुप का यह प्रयास केवल एक पर्यावरणीय अभियान नहीं था, बल्कि यह एक शैक्षिक पहल भी थी जिसमें विद्यार्थियों को प्रकृति के महत्व और पर्यावरणीय संतुलन को समझाने पर विशेष ध्यान दिया गया। शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक ज़िम्मेदारी का ऐसा तालमेल दुर्लभ है और एसकेडी ने इसे सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया।

संस्थान की यह पहल यह दर्शाती है कि स्कूल केवल परीक्षा केंद्र नहीं, बल्कि विचार निर्माण और सामाजिक चेतना का आधार होते हैं। 'विसडम वीक' के माध्यम से एसकेडी ग्रुप ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक अर्जन नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का विकास भी है।

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