कौशाम्बी: सैंता घाट बना अवैध खनन की मंडी, सिपाही पर मिलीभगत का आरोप; ग्रामीणों ने की FIR की मांग

कौशाम्बी के सैंता घाट पर धड़ल्ले से चल रहा अवैध मिट्टी खनन, पुलिसकर्मी पर मिलीभगत का आरोप, ग्रामीणों ने की DM से शिकायत

Jul 04, 2026 - 21:24
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कौशाम्बी: सैंता घाट बना अवैध खनन की मंडी, सिपाही पर मिलीभगत का आरोप; ग्रामीणों ने की FIR की मांग

(एडवोकेट अजय पण्डा / ब्यूरो)

कौशाम्बी : जनपद के थाना संदीपनघाट क्षेत्र अंतर्गत आने वाला सैंता घाट इन दिनों अवैध खनन का प्रमुख गढ़ बन चुका है। साहू ढाबा के ठीक पीछे स्थित इस घाट पर दिन-रात जेसीबी (JCB) मशीनें गरज रही हैं और धड़ल्ले से मिट्टी की खुलेआम लूट मची है। माफियाओं द्वारा पूरी जमीन को बेतरतीब तरीके से खोदा जा रहा है, जिससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है बल्कि सरकारी राजस्व को भी लाखों रुपये की चपत लग रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे अवैध कारोबार को स्थानीय पुलिस का कथित संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि मूरतगंज पुलिस चौकी में तैनात एक 'खास' सिपाही (कारखास) की मिलीभगत से यह पूरा खेल रात-दिन बिना किसी डर के चल रहा है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि इसी सांठगांठ के चलते स्थानीय पुलिस इस गंभीर मामले पर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठी है और कोई कार्रवाई नहीं कर रही।

ग्रामीणों के तीखे सवाल: परमिशन की आड़ में तय सीमा से कई गुना ज्यादा खुदाई?इस अवैध खनन से परेशान और आक्रोशित स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:यदि खनन की कोई वैधानिक अनुमति (परमिशन) है भी, तो क्या नियमतः $7$ फीट से अधिक गहरी खुदाई करने की इजाजत दी जा सकती है?क्या पूरे सैंता घाट से चौबीसों घंटे (रात-दिन) अंधाधुंध मिट्टी निकालने का लाइसेंस माफियाओं को मिला हुआ है?ग्रामीणों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने किसी सीमित कार्य की अनुमति दी भी है, तो माफिया उसकी आड़ लेकर तय सीमा से कई गुना ज्यादा और अत्यधिक गहराई तक खनन कर रहे हैं।

ग्रामीणों की मुख्य मांग: क्षेत्र के पीड़ित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) कौशाम्बी और जिला खनन अधिकारी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों की मांग है कि मौके पर औचक छापेमारी कर अवैध कार्य में लगी जेसीबी मशीनों को तुरंत जब्त किया जाए। साथ ही, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले खनन माफिया और उनके मददगार पुलिसकर्मी के खिलाफ मुकदमा (FIR) दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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