भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक संकेत, जयशंकर की बीजिंग में उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात

विदेश मंत्री जयशंकर की बीजिंग यात्रा में उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात, द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार पर चर्चा।

Jul 15, 2025 - 22:10
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भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक संकेत, जयशंकर की बीजिंग में उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात
जयशंकर की बीजिंग में उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात

बीजिंग : भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपनी तीन दिवसीय एशियाई यात्रा के दौरान सोमवार को बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। जयशंकर वर्तमान में 13-15 जुलाई तक सिंगापुर और चीन की यात्रा पर हैं, और वह 15 जुलाई को तियानजिन में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की विदेश मंत्रियों की परिषद (CFM) की बैठक में भाग लेंगे।

🤝 भरोसे और संवाद पर जोर
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,

“बीजिंग पहुंचते ही उपराष्ट्रपति हान झेंग से मिलना सुखद अनुभव रहा। भारत ने चीन की एससीओ अध्यक्षता का समर्थन किया। मुझे विश्वास है कि हमारी बातचीत द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगी।”

🗣️ द्विपक्षीय रिश्तों में बदलाव का दौर
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने बैठक में कहा कि पिछले वर्ष अक्टूबर में कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात के बाद से भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
उन्होंने कहा,

"हमारे संबंधों के निरंतर सामान्यीकरण से दोनों देशों को परस्पर लाभकारी परिणाम मिल सकते हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली का भारत में विशेष स्वागत हो रहा है।"

जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि पड़ोसी और वैश्विक शक्ति के रूप में भारत और चीन के बीच खुले संवाद और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान बेहद आवश्यक है।

🇸🇬 सिंगापुर में रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा
इससे पहले जयशंकर ने 13 जुलाई को सिंगापुर में राष्ट्रपति थर्मन षणमुगरत्नम से मुलाकात की। साथ ही उन्होंने उप-प्रधानमंत्री गान किम योंग और विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालकृष्णन से भी वार्ता की।
बैठक में आईएसएमआर सम्मेलन के दूसरे चरण की समीक्षा की गई, जिसमें सेमीकंडक्टर, औद्योगिक पार्क, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और निवेश जैसे क्षेत्र शामिल थे। उन्होंने आसियान, हिंद-प्रशांत और वैश्विक विकास मुद्दों पर भी विचार साझा किए।

यह यात्रा भारत की पूर्वी कूटनीतिक सक्रियता और बहुपक्षीय मंचों पर प्रभावशाली भागीदारी का प्रतीक मानी जा रही है। यदि यह संवादात्मक रुख जारी रहा, तो भारत-चीन संबंधों में संतुलन और स्थिरता की नई दिशा मिल सकती है।

रिपोर्ट – शाश्वत तिवारी

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