India-Figi : ग्लोबल साउथ की मजबूत होती आवाज
भारत और फिजी के बीच रक्षा और व्यापार साझेदारी मजबूत हो रही है, जो एक स्वतंत्र और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

यह दौरा विशेष रूप से ऐतिहासिक था, क्योंकि भारत ने फिजी को अपने महत्वपूर्ण 'ग्लोबल साउथ' साझेदारों में से एक घोषित किया है। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, भारत प्रशांत क्षेत्र में अपनी सामरिक पकड़ मजबूत करना चाहता है। फिजी, अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, भारत के लिए समुद्री सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण राष्ट्र है। यही वजह है कि भारत अब इन छोटे द्वीपीय देशों के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 में फिजी यात्रा के बाद से ही इस दिशा में तेजी देखी गई। उस यात्रा के दौरान ही 'फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइसलैंड कॉर्पोरेशन' (FIPIC) की शुरुआत की गई थी। इसके बाद से भारत ने किरीबाती, वानुआतु, तिमोर-लेस्ते, ब्रुनेई जैसे देशों के साथ भी अपने सहयोग को लगातार बढ़ाया है। यह बढ़ती साझेदारी न केवल भारत को 'ग्लोबल साउथ' की आवाज के रूप में स्थापित कर रही है, बल्कि पूरे प्रशांत क्षेत्र के साथ हमारे संबंधों को भी नई मजबूती दे रही है।
प्रधानमंत्री राबुका के साथ मुलाकात के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भले ही भारत और फिजी भौगोलिक रूप से दूर हैं, लेकिन उनके उद्देश्य और आकांक्षाएं एक जैसी हैं। दोनों देश एक ऐसी विश्व व्यवस्था का निर्माण करना चाहते हैं जहां 'ग्लोबल साउथ' की संप्रभुता, पहचान और विचारों का सम्मान किया जाए। विदेश मंत्रालय की सचिव (दक्षिण) नीना मल्होत्रा ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत में राजनीतिक, आर्थिक, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। फिजी को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक मूल्यवान और प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जाता है।
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