हिमाचल के सेब उत्पादकों को सताया डर, ई20 ईंधन से कृषि मशीनरी हो रही खराब
हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को डर है कि २० प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ई20 पेट्रोल उनकी कृषि मशीनों को नुकसान पहुंचा रहा है।
शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों और बागवानों के बीच इन दिनों एक नई चिंता घर कर गई है। राज्य के ऊपरी क्षेत्रों में बागवानी के लिए इस्तेमाल होने वाले पावर टिलर, ग्रास कटर और स्प्रे पंप जैसे कृषि उपकरणों में तकनीकी खराबी आने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बागवानों का मानना है कि पेट्रोल में २० प्रतिशत इथेनॉल के मिश्रण वाला E20 ईंधन उनकी महंगी कृषि मशीनरी पर भारी पड़ रहा है और उसे समय से पहले खराब कर रहा है।
हिमाचल के सेब बेल्ट (जैसे शिमला, कुल्लू और मंडी के ऊपरी इलाके) में इन दिनों बगीचों में स्प्रे और घास कटाई का काम जोरों पर है। बागवानों का कहना है कि ई20 ईंधन के इस्तेमाल के बाद से मशीनों के कार्बोरेटर, रबर पाइप और इंजन के अन्य संवेदनशील हिस्सों में जंग और ब्लॉकेज (रुकावट) की समस्या आ रही है। चूंकि यह मशीनरी दोपहिया या चौपहिया वाहनों की तुलना में लंबे समय तक खड़ी रहती है, इसलिए इथेनॉल नमी को सोख लेता है, जिससे ईंधन टैंक में पानी जमा होने लगता है।
मरम्मत की लागत और बागवानों की मांग:
मशीनों के बार-बार खराब होने से बागवानों को सीजन के बीच में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यांत्रिक विशेषज्ञों (मैकेनिक्स) का भी कहना है कि पुराने कृषि उपकरण शत-प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुकूल नहीं हैं। इन उपकरणों के पुर्जे जल्दी गल रहे हैं, जिससे मरम्मत की लागत दोगुनी हो गई है।
इस संकट को देखते हुए सेब उत्पादक संघों ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। बागवानों की मांग है कि कृषि कार्यों और बागवानी उपकरणों के लिए या तो बिना इथेनॉल वाला शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए, या फिर कंपनियों को ऐसी नई मशीनें बाजार में लानी चाहिए जो इस नए ईंधन के पूरी तरह अनुकूल हों। यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में सेब उत्पादन की लागत और बढ़ सकती है।
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