हिमाचल प्रदेश: सिरमौर का निर्यात ₹3,200 करोड़ के पार, बना नया ग्लोबल रोडमैप
हिमाचल के सिरमौर जिले का निर्यात ₹3,200 करोड़ पार; जिला निर्यात संवर्धन समिति ने तैयार किया ग्लोबल ग्रोथ रोडमैप।
सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) : हिमाचल प्रदेश का सिरमौर जिला राज्य के सबसे तेजी से उभरते औद्योगिक और निर्यात हब (Export Hub) के रूप में सामने आया है। वित्त वर्ष 2024-25 में सिरमौर जिले ने ₹3,200 करोड़ से अधिक के निर्यात का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। फार्मास्युटिकल (दवा निर्माण), टेक्सटाइल (कपड़ा) और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में मिली इस भारी सफलता के बाद, जिला प्रशासन ने अब सिरमौर के उत्पादों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने के लिए एक व्यापक 'ग्लोबल ग्रोथ रोडमैप' तैयार किया है。
नाहन में आयोजित जिला निर्यात संवर्धन समिति (District Export Promotion Committee) की एक उच्च स्तरीय बैठक में इस रणनीति की समीक्षा की गई。 4 वर्षों में ₹2,097 करोड़ से ₹3,200 करोड़ तक का सफरउपायुक्त (DC) प्रियंका वर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सरकारी आंकड़ों के जरिए जिले की अभूतपूर्व प्रगति को साझा किया गया। सिरमौर का निर्यात ग्राफ लगातार बढ़ रहा है:
वर्ष 2021-22: ₹2,097.56 करोड़ वर्ष 2022-23: ₹2,705.21 करोड़ वर्ष 2023-24: ₹2,841.12 करोड़ वर्ष 2024-25: लगभग ₹3,200 करोड़ से अधिक जिले के कालाअम्ब, पांवटा साहिब, धौलाकुआं और नवनिर्मित सतौन विकास गलियारे (Sataun Growth Corridor) जैसे प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर इस आर्थिक क्रांति के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं। इन क्षेत्रों से सन फार्मा, मैनकाइंड फार्मा, ब्लू स्टार और पिडिलाइट जैसी बड़ी कंपनियां वैश्विक बाजारों में अपने उत्पाद भेज रही हैं।
"हमारा उद्देश्य प्रशासनिक और नियामक अड़चनों को दूर कर नए निर्यातकों को बढ़ावा देना है। बेहतर लॉजिस्टिक्स और डिजिटल क्लीयरेंस के जरिए हम सिरमौर के लोकल उत्पादों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाएंगे।" - प्रियंका वर्मा, उपायुक्त, सिरमौर 'पीच बाउल ऑफ इंडिया' और पारंपरिक उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजारनए रोडमैप के तहत केवल औद्योगिक उत्पाद ही नहीं, बल्कि सिरमौर के समृद्ध बागवानी और पारंपरिक उत्पादों को भी वैश्विक स्तर पर निर्यात करने की तैयारी है। राजगढ़ क्षेत्र, जिसे भारत का 'पीच बाउल' (आड़ू का कटोरा) कहा जाता है, वहां के आड़ू, प्लम, अखरोट, लहसुन और कीनू को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजने की योजना है।
इसके साथ ही, भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त प्रसिद्ध 'सिरमौरी लोइया' (पारंपरिक ऊनी शॉल/पोशाक) के व्यावसायिक उत्पादन को गति दी जा रही है। सिरमौर के विशेष अदरक, जिसमें फाइबर की मात्रा कम और ओलेओरेसिन का मूल्य अधिक होता है, के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। औद्योगिक विस्तार के लिए भारत सरकार को भारत औद्योगिक विकास योजना के तहत कालाअम्ब में 388 बीघा भूमि पर एक नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
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