राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का आह्वान: विकसित भारत के लिए नागरिक-केंद्रित बनें हमारे शहर
हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने विकसित भारत के लिए नागरिक-केंद्रित और पर्यावरण-अनुकूल शहरों के निर्माण का आह्वान किया।
शिमला : हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने राजभवन में आयोजित 'सतत शहरी विकास और भविष्य के शहर' विषय पर एक उच्च स्तरीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @ 2047' के दूरदर्शी विजन को साकार करने के लिए देश के शहरों को नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल (सस्टेनेबल) बनाना बेहद अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि शहरीकरण केवल कंक्रीट के ढांचे खड़े करना नहीं है, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर को गुणात्मक रूप से सुधारना है।
शहरी नियोजन (टाउन प्लानिंग) के विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शहरों पर लगातार आबादी का दबाव बढ़ रहा है, जिसके कारण ट्रैफिक जाम, कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं।
"पहाड़ी राज्यों में अनियोजित निर्माण और कंक्रीट के जंगल पर्यावरण संतुलन के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। हमारे योजनाकारों को ऐसे मॉडल विकसित करने होंगे जो आधुनिक भी हों और प्रकृति के साथ तालमेल भी रखते हों।" - शिव प्रताप शुक्ल, राज्यपाल
जल संरक्षण और हरित परिवहन को बढ़ावा देने की अपील
राज्यपाल ने भविष्य के स्मार्ट शहरों के निर्माण के लिए बुनियादी ढांचे में व्यापक बदलाव लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन, वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) और सौर ऊर्जा जैसे हरित विकल्पों को अनिवार्य रूप से नीतिगत योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही, उन्होंने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को डिजिटल और इलेक्ट्रिक-आधारित (ई-व्हीकल) बनाने का आह्वान किया, ताकि प्रदूषण के स्तर को न्यूनतम किया जा सके। राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि दूरदर्शी शहरी नीतियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही भारत के शहर वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाएंगे।
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