हिमाचल हाईकोर्ट ने केलांग पांगी में पंचायती राज संस्थाओं का विघटन रोका
हिमाचल उच्च न्यायालय ने केलांग और पांगी में पंचायती राज संस्थाओं को भंग करने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसले में राज्य के जनजातीय क्षेत्रों, लाहौल-स्पीति के केलांग और चंबा जिले के पांगी उपमंडल में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को समय से पहले भंग करने के सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से इन सुदूर क्षेत्रों के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण विकास निकायों को एक बड़ी राहत मिली है।
यह सुरक्षात्मक आदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा दायर एक संयुक्त याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष पुरजोर दलील दी थी कि राज्य सरकार द्वारा इन संवेदनशील जनजातीय क्षेत्रों में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई संस्थाओं को कार्यकाल समाप्त होने से पहले भंग करने का निर्णय पूरी तरह से मनमाना, तर्कहीन और स्थापित पंचायती राज अधिनियम की धाराओं के खिलाफ था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर इस विघटन प्रक्रिया के पीछे के कानूनी आधारों पर विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक केलांग और पांगी की सभी प्रभावित पंचायतों में वर्तमान व्यवस्था यथावत लागू रहेगी और निर्वाचित प्रतिनिधि बिना किसी प्रशासनिक बाधा के अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे।
इस न्यायिक हस्तक्षेप का स्थानीय जनभावनाओं और विभिन्न राजनीतिक हलकों में पुरजोर स्वागत किया गया है। क्षेत्रीय नेताओं का कहना है कि सर्दियों के कठिन मौसम और भौगोलिक चुनौतियों से जूझने वाले इन इलाकों में विकास कार्यों की निरंतरता के लिए पंचायतों का सक्रिय रहना अनिवार्य है। सरकार के अचानक लिए गए इस फैसले से कई महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास योजनाएं अधर में लटकने की कगार पर पहुंच गई थीं, जिन्हें अब अदालत के इस आदेश से संजीवनी मिल गई है।
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